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बुधवार, 23 अप्रैल, 2008 को 22:40 GMT तक के समाचार

हॉकी-फ़ुटबॉल प्राथमिकता सूची में

भारत के नए खेलमंत्री एमएम गिल ने हॉकी और फ़ुटबॉल सहित आठ खेलों को प्राथमिकता सूची में शामिल करने की घोषणा की है.

पुरुषों की हॉकी टीम के लगातार ख़राब प्रदर्शन के बाद इसे पिछले साल जून में प्राथमिकता सूची से हटाकर साधारण खेलों की सूची में डाल दिया गया था.

हाल के दिनों में बदनामी झेल रही हॉकी के लिए इसे एक तरह से जीवनदान की तरह माना जा रहा है.

हॉकी और फ़ुटबॉल के अलावा जो अन्य खेल प्राथमिकता सूची में शामिल किए गए हैं उनमें तैराकी, बॉस्केटबॉल, साइकलिंग, वॉलीबॉल, स्कूली खेल और यूनिवर्सिटी खेल.

इनमें से हॉकी, तैराकी, बॉस्केटबॉल और स्कूली खेलों को साधारण खेलों की सूची से प्राथमिकता की सूची में लाया गया है जबकि शेष खेलों को अन्य खेलों की सूची से पदोन्नत किया गया है.

जिन खेलों को पदोन्नत किया गया है उन्हें अंतरराष्ट्रीय कोच की सेवाएँ लेने से लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने तक कई सुविधाएँ मिल सकेंगीं.

हॉकी पर नज़र

नए खेल मंत्री का हॉकी को प्राथमिकता सूची में डालने का फ़ैसला कई लोगों को लिए आश्चर्य पैदा करने वाला था.

भारत के राष्ट्रीय खेल हॉकी ने पिछले दिनों बदनामी ही कमाई है. 80 सालों में पहली बार ओलंपिक खेलों के लिए क्वालिफ़ाइंग मैच में हारने से लेकर हॉकी फ़ेडरेशन के सचिव के ज्योतिकुमारन के कथित रुप से घूस लेने तक.

खेल मंत्री एमएस गिल ने कहा है कि सरकार हॉकी के पतन की मूक दर्शक नहीं बनी रह सकती और उन्होंने इंडियन हॉकी फ़ेडरेशन की चयन समिति में भारत सरकार की ओर से दो नए पर्यवेक्षरकों की नियुक्ति की घोषणा की.

उन्होंने घोषणा की है कि आरएस भोला और रुपा रानी की जगह अब अजीत पाल सिंह और जफ़र इक़बाल पर्यवेक्षक होंगे.

गिल ने खेल संघों की दिल्ली में हो रही बैठक में कहा कि खेल संघों को चाहिए कि वे अपने एकाउंट के मामले में साफ़सुथरे बने रहें और युवा लोगों को मौक़ा दें.

उन्होंने कहा कि खेल संघों की स्वायत्ता की वकालत तो उन्हें समझ में आती है लेकिन खेल संघों को अपनी कार्यकुशलता भी साबित करनी होगी.

उन्होंने खेल संघों में आतंरिक लोकतंत्र की भी वकालत की.