शुक्रवार, 18 अप्रैल, 2008 को 20:43 GMT तक के समाचार
सुशील झा
बीबीसी संवाददाता, मुम्बई
शाहरुख खान की कोलकाता नाइट राइडर्स टीम का संगीत भारतीय फ़िल्मों के चार जाने माने संगीतकारों ने मिलकर तैयार किया है.
इससे अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि ऐसा करने में कितने पैसे ख़र्च हुए होंगे.
इतना ही नहीं कोलकाता टीम की योजना विभिन्न मैचों में ‘मैन आफ द मैच’ को सोने की टोपी भेंट करने की है.
इस प्रतियोगिता में टीमों ने ख़िलाड़ियों को खरीदने में करोड़ों रुपए खर्च किए हैं.
आईपीएल के सीओओ सुंदर रामन कहते हैं ‘हमारे पास एक अच्छा प्रोडक्ट है और बेहतरीन ब्रांड भी. यह प्रतियोगिता पूरी दुनिया में अपनी साख बनाने की ताकत रखती है और इस बात से कोई इंकार नहीं कर सकता है कि इससे पैसा भी कमाया जा सकेगा.’
पैसे का खेल
आईपीएल से भारतीय क्रिकेट बोर्ड को काफ़ी पैसा मिलेगा क्योंकि उनके पास मैचों के प्रसारण अधिकार से लेकर कई और तरह के अधिकार भी हैं.
लेकिन क्या वो टीमें जो खिलाड़ियों से लेकर मार्केटिंग में पैसा लगा रही हैं, उन्हें फ़ायदा होगा?
क्रिकेट मामलों के जानकार अयाज़ मेमन इसे लाख टके का सवाल बताते हैं, 'क्योंकि टीमो ने करोड़ों रुपए लगाकर खिलाड़ियों को खरीदा
है. संगीत और मार्केटिंग में भी पैसा लगा है. इतना पैसा आख़िर कैसे वापस होगा?’
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| शाहरुख कहते हैं उनकी टीम को फ़ायदा होगा |
आईपीएल की सबसे मंहगी टीमों में से एक मुंबई इंडियन्स के मैनेजर आर बालचंद्रन को पूरा विश्वास है कि ये प्रतियोगिता फ़ायदे का सौदा होगी.
आर बालचंद्रन इस प्रतियोगिता को लंबी रेस का घोड़ा बताते हैं.
मुंबई इंडियन्स रिलायंस की टीम है. रिलायंस एक बिज़नेस घराना है. बैंगलोर की टीम उद्योगपति विजय मलाया के हाथ में है, लेकिन शाहरुख और प्रीति ज़िंटा जैसे फ़िल्म कलाकार क्या सोचते हैं?
शाहरुख कहते हैं ‘पूरी ईमानदारी से कहूं तो मुझे ऐसा लगता है कि हमारी टीम ही उन गिनी चुनी टीमों में होगी जिनको थोड़ा बहुत फ़ायदा होगा. ये राह आसान नहीं है लेकिन मुझे जिस तरह के मैनेजर मिले हैं उससे मैं संतुष्ट हूं.’
आपीएल की क्षमता
आईपीएल में कई स्तर पर क्रिकेट को बदलने की क्षमता दिखती है. मनोरंजन और क्रिकेट के इस नए स्वरूप को सभी स्वीकार करते हैं. किसी ज़माने मे मफतलाल से खेलने वाले जे वी संपत अब कोच हैं.
जे वी संपत कहते हैं, ‘हमारे समय में न तो इतना पैसा था और न ही चैनलों और अख़बारों की भरमार. पहले खिलाड़ियों को ज़्यादा मौके नहीं मिलते थे. लेकिन अब इंडियन क्रिकेट लीग औऱ इंडियन प्रीमियर लीग हैं. ख़िलाड़ियों को अब कहीं न कहीं मौका मिल जाएगा. अब रणजी मैचों में भी अच्छा पैसा मिलने की उम्मीद है.’
लेकिन सवाल ये भी है कि क्या भारत में आईपीएल की लीग भावना काम करेगी?
मेमन कहते हैं ‘ भारत में लीग टूर्नामेंट और टीमों के प्रति वफादारी का कोई उदाहरण क्रिकेट में नहीं रहा है. हालांकि कोलकाता में मोहन बागान और ईस्ट बंगाल की एक फैन फॉलोइंग है. ऐसे ही प्रीमियर हॉकी लीग भी बनी जिसमें अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी थे मगर वो नहीं चली. ’
मेमन मानते हैं कि टीमों के प्रति वफ़ादारी सुनिश्चित होने में कम से कम दो-तीन साल लगेंगे.
आने वाले समय में इंडियन प्रीमियर लीग के मैचों पर, खिलाड़ियों पर और पैसों पर सबका ध्यान रहेगा और इस बात पर भी कि ये ताबड़तोड़ खेले जाने वाले और धड़ाधड़ नोट छापने वाले ये मैच टेस्ट और वनडे मैचों पर कितना प्रभाव डालेंगे.