सोमवार, 31 मार्च, 2008 को 04:28 GMT तक के समाचार
ओलंपिक मशाल एक विशेष विमान से ग्रीस से चीन पहुँच गई है.
बीजिंग में भारतीय पत्रकार सैबल दास ने बताया कि इस मशाल को थ्येनआनमन चौक ले जाया गया है जहाँ विशेष आयोजन आयोजित किए जा रहे हैं.
यहाँ संभावित प्रदर्शनों को रोकने के लिए कड़े सुरक्षा इंतज़ाम किए गए हैं.
उल्लेखनीय है कि अगस्त, 2008 में चीन में ओलंपिक खेलों का आयोजन रखा गया है.
मंगलवार को ये मशाल कज़ाकस्तान के अलमाती शहर ले जाई जाएगी. इसके बाद 20 देशों से गुजरती हुई ये मशाल आठ अगस्त को वापस बीजिंग पहुँचेगी.
इसके पहले तिब्बत में चीन की कार्रवाई को लेकर ग्रीस में मशाल सौंपने का विरोध हुआ.
तिब्बत के समर्थन में आए कुछ प्रदर्शनकारियों ने स्टेडियम में घुसकर पुलिस घेरा तोड़ने की कोशिश की.
विरोध
एथेंस में हज़ारों लोगों की मौजूदगी के बीच ओलंपिक मशाल को स्टेडियम में लाया गया और उसे चीन में ओलंपिक खेलों के आयोजक लुई की को सौंप दिया गया.
उन्होंने कहा," मशाल को माउंट एवरेस्ट पर भी ले जाया जाएगा जो मानव सभ्यता के विकास में ओलंपिक की यात्रा को दर्शाता है."
स्टेडियम के बाहर कुछ लोग एक बैनर लेकर आए थे जिस पर लिखा हुआ था ' तिब्बत में नरसंहार बंद करो'. लेकिन ये लोग स्टेडियम के अंदर नहीं आ सके.
प्रदर्शनों को देखते हुए ग्रीस में ओलंपिक टॉर्च का रास्ता बदल दिया गया था.
वहीं भारत में कई निर्वासित तिब्बतियों ने 'आज़ादी की मशाल' नाम से एक यात्रा शुरु की है. इसका मकसद चीन के प्रति विरोध जताना है.
ये यात्रा रविवार को दिल्ली से शुरु हुई और नौ अप्रैल को ये सैन फ़्रांसिस्को जाएगी.
निर्वासित तिब्बत सरकार का कहना है कि हाल में चीन में सुरक्षाबलों के साथ झड़प में कम से कम 140 लोग मारे गए थे लेकिन चीन का कहना है कि हिंसा पर उतारू भीड़ में 19 लोगों की मौत हुई थी.