रविवार, 23 मार्च, 2008 को 04:39 GMT तक के समाचार
'इंडियन प्रीमियर लीग' यानी आईपीएल के लिए खिलाड़ियों के लिए बोली लगाया जाना भारतीय टीम के पूर्व कप्तान राहुल द्रविड़ को पसंद नहीं आया है.
द्रविड़ ने कहा, "मुझे उम्मीद है दोबारा इस तरह से क्रिकेट खिलाड़ियों की नीलामी नहीं की जाएगी."
शनिवार को चेन्नई में राहुल द्रविड़ पाँच स्कूलों के बच्चों से मुलाक़ात कर रहे थे इसी दौरान एक छात्र ने उनसे ये सवाल किया.
बाद में द्रविड़ के इस विचार को तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम करुणानिधि का भी समर्थन मिला.
करुणानिधि ने कहा कि वो भी पसंद नहीं करते कि खिलाड़ियों की इस तरह से नीलामी की जाए.
करुणानिधि खुद क्रिकेट के बहुत बड़े प्रशंसक हैं.
हालांकि, राहुल द्रविड़ खुद यूबी ग्रुप के चेयरमैन विजय माल्या की बैंगलोर की टीम 'रॉयल चैलेंजर्स' के 'आइकन' खिलाड़ी हैं और इस टीम के कप्तान भी हैं.
हर 'आइकन' खिलाड़ी को अपनी टीम के सबसे महंगे खिलाड़ी से 15 प्रतिशत ज़्यादा की रकम मिली है. और वे नीलामी का हिस्सा नहीं रहे हैं.
इस तरह से राहुल द्रविड़ चार करोड़ रुपए कमाने जा रहे हैं.
द्रविड़ की नसीहत
स्कूली छात्रों के साथ इस मुलाक़ात में बच्चों ने राहुल के सामने सवालों की झड़ी लगा दी.
एक सवाल के जवाब में राहुल द्रविड़ ने कहा कि किसी भी खिलाड़ी के निजी प्रदर्शन से ज़्यादा ये बात अहमियत रखती है कि उसने टीम को कामयाबी दिलाने के लिए क्या किया.
द्रविड़ ने कहा, "भारतीय टीम के हर खिलाड़ी की ये ख़्वाहिश होती है कि वो अपनी टीम के लिए सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करे."
द्रविड़ ने चेन्नई के वेल्लामल शिक्षा ट्रस्ट के स्कूली बच्चों के बीच तक़रीबन पाँच घंटे बिताए.
राहुल ने बच्चों को सलाह दी कि छात्र भी अगर मिलजुलकर एक टीम की तरह पढ़ाई और खेल दोनों में डट कर मेहनत करेंगे तो वो बेहतर परिणाम दे सकते हैं.
द्रविड़ ने बच्चों से कहा कि उन्हें पढ़ाई पर पूरा ध्यान देना चाहिए. उन्होंने सलाह दी कि पढ़ाई के साथ-साथ खेल उनमें नेतृत्व क्षमता का विकास करेगा.