बुधवार, 19 मार्च, 2008 को 15:34 GMT तक के समाचार
भारतीय क्रिकेट टीम के युवा गेंदबाज़ एस श्रीसंत को ग़ुस्सा कितना आता है ये तो सबने कई बार मैदान पर देखा है.
इस ग़ुस्से से बचने और शांत रहने के लिए वे इन दिनों आयुर्वेदिक उपचारों और योग का सहारा ले रहे हैं.
लेकिन इससे भी ज़्यादा आईसीसी के डर ने उनके ग़ुस्से पर लगाम कसी हुई है.
इस भय से कि यदि उन्होंने सीमा रेखा को पार किया तो अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) के कोप का भागी बनना पड़ेगा, वे अपने गुस्से को आजकल क़ाबू में रखते हैं.
दिल्ली में संवाददाताओं से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा, "आयुर्वेदिक उपचारों और योग से मेरा ग़ुस्सा कम रहता है. यदि मैने अपने ग़ुस्से पर क़ाबू नहीं रखा तो आईसीसी मुझ पर तीन टेस्ट मैंचों की पाबंदी भी लगा सकता है- यह भी मुझे मैदान पर हमेशा याद रहता है."
अब शांत हैं श्रीसंत
ग़ौरतलब है कि श्रीसंत मैदान पर विपक्षी खिलाड़ियों से गाहे-बगाहे उलझते रहे हैं.
उन्होंने कहा, "ऑस्ट्रेलियाई दौरे पर जब-जब मुझे ग़ुस्सा आता था मैं अपने रन-अप पर वापस लौट आता था ग़ुस्सा शांत करने."
यह पूछने पर कि ऑस्ट्रेलियाई दौरे पर न सिर्फ़ उनका ग़ुस्सा बल्कि उनकी गेदबाज़ी भी काफ़ी 'शांत' दिखी, ऐसा क्यों?
श्रीसंत का कहना था, "ऑस्ट्रेलियाई दौरे पर मैं कंधे की चोट से लौटा ही था और मैने सिरीज़ में भाग लेने से पहले बहुत कम अभ्यास किया था."
उन्होंने उम्मीद जताई कि दक्षिण अफ़्रीका के साथ इस महीने शुरू होने वाली सीरिज़ में उनका प्रदर्शन अच्छा रहेगा.