सोमवार, 10 मार्च, 2008 को 09:11 GMT तक के समाचार
रविवार को ओलंपिक हॉकी क्वालिफ़ायर मुक़ाबले में भारतीय टीम ब्रिटेन की टीम से 0-2 से हार गई है. इस तरह पिछले 80 साल में पहली बार भारत टीम ओलंपिक क्वालिफ़ायर से ही बाहर हो गई है.
कभी हॉकी की दुनिया की बादशाह रही भारतीय टीम को ओलंपिक इतिहास में पहली बार क्वालीफ़ाइंग दौर से गुजरना पड़ा क्योंकि वह वर्ष 2006 के एशियाई खेलों में फ़ाइनल में नहीं पहुँच पाई थी.
लेकिन भारतीय टीम ने अपनी बची हुई साख को भी गँवा दिया.
वर्ष 1928 के बाद ये पहली बार हुआ है कि ओलंपिक में आठ बार स्वर्ण पदक जीतने वाली भारतीय हॉकी टीम ओलंपिक में खेलने के लिए क्वालीफ़ाई भी नहीं कर पाई है.
इसी वर्ष चीन में बीज़िंग में होने वाले ओलंपिक खेलों के लिए इन दिनों चिली में हॉकी क्वालीफ़ाइंग मैच खेले जा रहे थे.
पहले दस मिनट में दो गोल
भले ही हॉकी जैसे विषय पर बनी फ़िल्म और चक दे... जैसे गाने हिट हों अपना जलवा दिखा रहे हों पर मैदान पर भारतीय हॉकी की स्थिति बद से बदतर होती नज़र आ रही है.
ब्रिटेन की टीम से बैरी मिडिलटन और रिचर्ड मैनटेल ने शानदार खेल का प्रदर्शन करते हुए मात्र 10 मिनट के भीतर ही दो गोल दाग दिए थे.
चौथे ही मिनट में ब्रिटेन की टीम के बैरी मिडलटन ने गोल किया और फिर पेनल्टी कॉर्नर के ज़रिए रिचर्ड मैनटेल ने दूसरा गोल किया.
इसके बाद भारतीय टीम हरकत में ज़रूर आई लेकिन फ़र्स्ट हाफ़ में सरदार सिंह और सेकिंड हाफ़ में प्रभजोत सिंह को येलो कार्ड दिखाया गया और इससे भारतीय टीम का उत्साह फीका पड़ गया.
भारत को पाँच पेनल्टी कार्नर के मौके मिले लेकिन भारत इनका फ़ायदा नहीं उठा पाया.
ब्रिटेन के टीम मैनेजर पिट निकलसन ने इस जीत के बाद कहा, "भारत के साथ यह मुक़ाबला कठिन तो था पर ब्रितानी टीम के खिलाड़ियों ने तैयारी में ख़ासी मेहनत की थी और उन्हें वो हासिल हुआ जो होना चाहिए था."