सोमवार, 03 मार्च, 2008 को 14:30 GMT तक के समाचार
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) ने उस दावे को ठुकरा दिया है कि भारतीय खिलाड़ी हरभजन सिंह ने सिडनी में पहले फ़ाइनल के दौरान ऑस्ट्रेलियाई दर्शकों को बंदर की तरह हाव-भाव दिखाकर चिढ़ाया था.
एक ऑस्ट्रेलियाई अख़बार ने दावा किया था कि सिडनी में हुए मैच के दौरान हरभजन सिंह ने दर्शकों के एक वर्ग को चिढ़ाया और उनकी दर्शकों के साथ तू-तू मैं-मैं भी हुई.
लेकिन आईसीसी मैच रेफ़री जेफ़ क्रो ने हरभजन सिंह को क्लीन चिट दे दी है. जेफ़ क्रो ने इस बारे में सुरक्षा अधिकारियों से बात की, हरभजन की तस्वीरें देखी और अख़बारों में छपी रिपोर्ट भी पढ़ी.
बाद में जारी किए गए एक बयान में उन्होंने कहा, "हरभजन सिंह के ख़िलाफ़ कोई क़दम उठाने की आवश्यकता नहीं है." आईसीसी मैच रेफ़री के बयान से पहले भारतीय टीम प्रबंधन ने भी हरभजन सिंह को निर्दोष बताया था.
भारतीय टीम मैनेजर बिमल सोनी ने कहा, "हरभजन ने कुछ भी नहीं किया है. ऐसी कहानियों पर हम लोग यक़ीन नहीं करते और इसकी कड़ी निंदा करते हैं. मेरा मानना है कि ये ग़लत है."
हरभजन सिंह का बचाव
आईसीसी मैच रेफ़री के बयान से पहले ऑस्ट्रेलिया के पूर्व कप्तान एलेन बॉर्डर भी हरभजन के बचाव में आए और उन्होंने कहा, "मैं नहीं मानता कि ये मामला इतना गंभीर है. मैं उस समय मैदान में हरभजन की तरफ़ ही था और मेरा तो ये मानना है कि हरभजन ने इस मामले में काफ़ी समझदारी दिखाई."
इससे पहले भी सिडनी टेस्ट के दौरान हरभजन सिंह पर ये आरोप लगा था कि उन्होंने ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी एंड्रयू साइमंड्स के ख़िलाफ़ नस्लभेदी टिप्पणी की है.
मैच रेफ़री ने हरभजन पर पाबंदी भी लगाई लेकिन हरभजन सिंह की अपील पर उन पर से प्रतिबंध हटा लिया गया. लेकिन इस घटना के बाद से ही दोनों देशों के खिलाड़ियों के बीच मैदान पर तनातनी चलती रही है.
पिछले दिनों सिडनी फ़ाइनल से पहले मैथ्यू हेडन ने एक रेडियो इंटरव्यू के दौरान हरभजन सिंह को 'जंगली घास-फूस' कह दिया था जिस पर क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने उन्हें फटकार लगाई.
सिडनी में हुए पहले फ़ाइनल में भारत ने ऑस्ट्रेलिया को छह विकेट से हरा दिया था. इस मैच में हरभजन सिंह ने शानदार गेंदबाज़ी की थी और मैथ्यू हेडन और एंड्रयू साइमंड्स को पवेलियन पहुँचाया था.