बुधवार, 13 फ़रवरी, 2008 को 12:28 GMT तक के समाचार
हॉलीवुड के जाने-माने निर्देशक स्टीवन स्पीलबर्ग ने बीजिंग ओलंपिक के कला सलाहकार के तौर पर काम करने से मना कर दिया है.
एक बयान जारी करके स्पीलबर्ग ने चीन पर आरोप लगाया है कि वह अपने निकट सहयोगी सूडान पर पर्याप्त दबाव नहीं डाल रहा है.
स्पीलबर्ग का कहना है कि सूडान के दारफुर इलाक़े में "जारी मानवीय त्रासदी" को रोकने में चीन जो भूमिका निभा सकता है, वह नहीं निभा रहा है.
उन्होंने अपने बयान में कहा, "मेरी अंतरात्मा मुझे इस बात की अनुमति नहीं दे रही कि मैं काम करता रहूँ, इस वक़्त मैं अपनी सारी ऊर्जा ओलंपिक खेलों में नहीं लगा सकता जबकि दारफुर के लोग अमानवीय यातनाएँ झेल रहे हैं."
स्पीलबर्ग ने कहा, "सूडान की सरकार हिंसा की घटनाओं के लिए ज़िम्मेदार है लेकिन चीन उन पर दबाव बनाने के लिए कुछ नहीं कर रहा है."
इस प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए चीन ने कहा है कि स्पीलबर्ग का "फ़ैसला उचित नहीं है" और "खेल में राजनीति को नहीं लाया जाना चाहिए".
स्पीलबर्ग दारफुर के मामले पर चीन की आलोचना करने वाले पहले हॉलीवुड स्टार नहीं हैं, मिया फैरो और जॉर्ज क्लूनी चीन की नीतियों को ग़लत ठहरा चुके हैं.
निजी फ़ैसला
अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक कमेटी ने कहा है कि यह स्पीलबर्ग का निजी फैसला है, कमेटी ने अपने बयान में कहा, "दारफुर का मामला बहुत गंभीर और दुखद है लेकिन यह संयुक्त राष्ट्र के कामकाज के दायरे में आता है."
सूडान के दारफुर इलाक़े में पिछले पाँच साल से चल रही हिंसा में कम से कम दो लाख लोग मारे गए हैं और तक़रीबन 20 लाख लोगों को अपना घर-बार छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा है.
बीबीसी संवाददाता का कहना है कि चीन ने ओलंपिक खेलों को राजनीतिक मुद्दों से हमेशा अलग रखने की कोशिश की है और जब भी ओलंपिक को राजनीति से जोड़ा गया है चीन ने उसकी सख़्त आलोचना की है.
विद्रोही
इस बीच दारफुर के विद्रोही गुटों ने स्पीलबर्ग के फ़ैसले का स्वागत किया है और कहा है कि सूडान की सरकार पर इसी तरह के दबाव की ज़रूरत है.
विद्रोही गुट सूडान लिबरेशन मूवमेंट के नेता अब्दुल वहीद मोहम्मद अहमद अल नूर ने कहा, "स्पीलबर्ग ने बहुत नेक काम किया है. इतिहास में उन्हें ऐसे व्यक्ति के रूप में याद किया जाएगा जिसे अपनी प्रसिद्धि और पैसे से ज्यादा चिंता इंसानी जानों की है."
सूडान के पास बहुत बड़े तेल भंडार हैं और वह चीन के बहुत बड़े पैमाने पर तेल की आपूर्ति करता है जबकि चीन सूडानी सेना को हथियारों की सप्लाई करता है और कूटनीतिक स्तर पर सूडान की कार्रवाइयों का समर्थन करता है.