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सोमवार, 07 जनवरी, 2008 को 06:51 GMT तक के समाचार

प्रभाष जोशी
वरिष्ठ पत्रकार

'हरभजन के ख़िलाफ़ फ़ैसला एकतरफ़ा'

मैं यह मानने के लिए मजबूर हूँ कि हरभजन के ख़िलाफ़ किया गया फ़ैसला एकतरफ़ा है.

हरभजन ने ऐसी कोई बात कही हो इसका खिलाड़ियों के अलावा कोई गवाह नहीं है. अंपायरों ने तो सिर्फ़ साइमंड्स और पोंटिंग की शिकायत को ही वहाँ पहुँचाया था.

मैं खेल और अंपायर नाम की संस्था को बहुत पवित्र और महत्वपूर्ण मानता हूँ.

मैं अंपायरों को बदनाम करने की किसी भी कार्रवाई के ख़िलाफ़ हूँ.

लेकिन इसमें कोई संदेह नहीं कि पहले ही दिन साइमंड्स को बकनर ने जिस तरह नॉट आउट दिया, उससे बिल्कुल साफ़ है कि बकनर अब ऐसे महत्वपूर्ण मैचों में अंपायरिंग करने के योग्य नहीं रह गए हैं.

बकनर की अक्षमता सरासर ऐसी थी जो कि मैच को चाहे-अनचाहे ऑस्ट्रेलिया की झोली में डाल गई.

इसलिए मैं मानता हूँ कि यह मैच नहीं था, यह तमाशा था और इसे तमाशा बनाने का सारा श्रेय इन दो अंपायरों को जाता है.

क्रिकेट बना तमाशा

माइक प्रॉक्टर कौन हैं, वे उस दक्षिण अफ़्रीका के खिलाड़ी हैं जहाँ रंगभेद बुरी तरह से चलता था.

रंगभेद चलाने वाले खिलाड़ियों में से माइक प्रॉक्टर भी एक खिलाड़ी हैं.

मुझे लगता है कि बीसीसीआई ने कड़ा रुख़ लिया है, उन्होंने कहा है कि अंपायर बदलिए, ये नहीं चलेंगे.

बीसीसीआई की तरफ़ क्रिकेट खेलने वाले आधे से अधिक देश होंगे और आईसीसी को ये स्थिति संभालना मुश्किल पड़ जाएगा.

ईमानदारी से पूछें तो मुझे यह बहुत बुरा लगता है कि क्रिकेट के मैच के दौरान क्रिकेट के बजाए ऐसी बातों पर सारा ध्यान डाला जाता है जिनका खेल पर बहुत नकारात्मक असर पड़ता है.

हमने कई अन्य जगहों पर भी देखा है कि क्रिकेट के दौरान ऐसे कई कारनामे होते रहते हैं जो खेल को तमाशा या विवाद बनाने की कोशिश करते हैं.

आजकल खेल खिलाड़ियों और दर्शकों के लिए होने के बजाए उन टीवी चैनलों के लिए होता जा रहा है जिनकी टीआरपी विवाद खड़े करने और विवाद चलाने से ही चलती है.

(समीर आत्मज मिश्र से बातचीत पर आधारित)