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शनिवार, 15 दिसंबर, 2007 को 15:55 GMT तक के समाचार

मलय नीरव
दिल्ली से

'आईसीएल-आईपीएल में हो मुक़ाबला'

भारत के लिए क्रिकेट विश्वकप जीतने वाली टीम के कप्तान कपिल देव इंडियन क्रिकेट लीग की शुरुआत से बहुत खुश नज़र आ रहे हैं.

ऑस्ट्रेलिया के कैरी पैकर की तर्ज पर देश-विदेश के कई क्रिकेटरों के साथ शुरू हुआ यह टूर्नामेंट अब अपने अंतिम पड़ाव पर पहुँच चुका है.

रविवार को आईसीएल के पहले 20-20 टूर्नामेंट का फ़ाइनल हरियाणा में पंचकुला के ताऊ देवीलाल स्टेडियम में खेला जाएगा.

इस टूर्नामेंट और आगे की योजना को लेकर आईसीएल के चेयरमैन कपिल
देव से विशेष बातचीत के प्रमुख अंशः-

कपिल जी आपने जिस टूर्नामेंट की शुरुआत की थी आज वो अपने चरमोत्कर्ष पर है. कैसा महसूस कर रहे हैं.

देखिए, अब इस वक़्त ऐसा कोई शब्द नहीं हैं कि मैं आप को बयान कर सकूं. बस यही कह सकता हूं कि जब बच्चा जन्म लेता है तो उसके माँ बाप को जो खुशी हो सकती है, बस वही खुशी हो रही है.

बहुत अच्छा लग रहा है कि हमारे साथी क्रिकेटरों ने एक बीड़ा उठाने का सोचा था और अब वह ऐसी जगह पर पहुंच गया है कि फ़ाइनल आ रहा है.

जब तक फ़ाइनल बॉल ख़त्म न हो जाए, सब चिंतित भी हैं कि कोई अड़चन नहीं आनी चाहिए लेकिन बहुत अच्छा लग रहा है.

आपने एक बीड़ा उठाया, आपके साथियों ने सहयोग दिया. तमाम प्रतिकूल चीज़ों के बीच आपने टूर्नामेंट किया. मैं जानना चाहता हूं कि क्या आपको लगता है कि लीग को आगे बढ़ाने के लिए कुछ और सहयोग मिलना चाहिए? क्या उम्मीद है आपको, लीग आगे कैसे चलेगी?

देखिए, अगर क्रिकेट की बात करते हैं तो जो क्रिकेट प्रेमी हैं, हमारा साथ दें. जो हमारी कमियां हैं, ग़लतियां हैं, उनको सामने लाएं. हम उनको सुधारना चाहेंगे.

हम रातोंरात तो कुछ नहीं कर पाएंगे लेकिन अगर कोई कमी हो हम दूर करना चाहते हैं. लेकिन हम कह सकते हैं कि पहली बार हुआ है तो बहुत अच्छा हुआ है. और उम्मीद करते हैं कि इसी तरह हमारी लगन बनी रहेगी.

आईसीएल टूर्नामेंट हो, आईपीएल टूर्नामेंट हो या कोई और लीग. क्रिकेट को जो एक नया स्वरूप मिला है, उसका क्या भविष्य है? क्या आप समझते हैं कि इसका भविष्य सुनहरा होगा?

ये एक नई पीढ़ी के लिए है. उन जवान बच्चों के लिए है जो शायद डॉक्टर, इंजीनियर या वैज्ञानिक नहीं बन सकते हैं लेकिन उनके पास एक कला है, एक खेल है, एक जोश है.

और अगर खेल में किसी को अपनी ज़िंदगी बनानी है तो मैं कहूंगा कि इसमें ये सब कुछ है.

क्या आपको लगता है कि आपका एक सपना पूरा हो गया है या एक तरह से यह अब भी अधूरा है. क्या ऐसा दिन आएगा जब बीसीसीआई की प्रोफ़ेशनल लीग और आईसीएल की टीम के बीच मुक़ाबले होने लगेंगे?

हम चाहेंगे कि वो दिन जल्द से जल्द आए. अगर ऐसा होता है तो अच्छा होगा. बहुत खुशी होगी. बोर्ड वाले भी इस तरह की चीज़ों पर ध्यान दें और हमारी पीठ थपथपाएं और बोलें कि बहुत अच्छा किया है.

एक क्रिकेटर होने के नाते हम चाहते हैं कि हमें सबका आशीर्वाद और प्यार मिले.

और मैदान भी चाहिए जिन पर मैच हो सके?

जी बिल्कुल. हर चीज़ चाहिए. अगर हमें कुछ सफलता हासिल करनी है तो एक-दूसरे का हाथ पकड़ कर ही आगे जाना चाहिए.

अगर हम क्रिकेट की सेवा कर सकते हैं, तो हम तैयार हैं.