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मंगलवार, 09 अक्तूबर, 2007 को 15:56 GMT तक के समाचार

हेयर ने भेदभाव के आरोप वापस लिए

अंपायर डेरेल हेयर ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) के ख़िलाफ़ लगाए गए नस्ली भेदभाव के आरोप वापस ले लिए हैं.

इंग्लैंड और पाकिस्तान के बीच पिछले वर्ष खेले गए ओवल टेस्ट मैच में पैदा हुए विवाद के बाद हेयर को विशिष्ट अंतरराष्ट्रीय अंपायरों के पैनल से हटा दिया गया था.

ओवल टेस्ट मैच अधूरा रह गया था क्योंकि अंपायर और पाकिस्तानी खिलाड़ियों को बीच गेंद से छेड़छाड़ को लेकर विवाद छिड़ गया था.

हेयर का कहना है कि आईसीसी ने सिर्फ़ उन्हीं को सज़ा दी जबकि उनके साथी अंपायर वेस्टइंडीज़ के बिली डॉक्ट्रोव के ख़िलाफ़ कोई कार्रवाई नहीं की.

अगले वर्ष मार्च में आईसीसी की बैठक में फ़ैसला किया जाएगा कि डेरेल हेयर को शीर्ष स्तर पर अंपायरिंग करने का मौक़ा मिलेगा या नहीं.

इस दौरान हेयर आईसीसी के पुर्नवास कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे.

आईसीसी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मैल्कम स्पीड ने इस बात पर संतोष प्रकट किया है कि मामला अब ख़त्म हो गया है.

स्पीड ने बीबीसी को दिए गए इंटरव्यू में कहा, "मैं खुश हूँ कि उन्होंने अपने आरोप बिना शर्त वापस ले लिए हैं."

हेयर का मुक़दमा लंदन के एक न्यायाधिकरण में चल रहा था और एक सप्ताह तक चली गवाहियों के बाद उसे खारिज कर दिया गया था.

माना जा रहा है कि आरोप वापस लेने के बदले उन्हें कोई आर्थिक पैकेज या शीर्ष स्तर पर अंपायरिंग का अवसर नहीं दिया जा रहा है.

अंपायरिंग के क्षेत्र में हेयर के भविष्य के बारे में मैल्कम स्पीड ने कहा, "यह आईसीसी बोर्ड को तय करना है जो कि दुनिया के विविध देशों का समूह जिसमें तरह-तरह के विचारों वाले लोग हैं, मुझे लगता है कि अगले छह महीने में तस्वीर कुछ साफ़ होगी."

आईसीसी के प्रमुख रे माली ने हेयर के फ़ैसले का स्वागत किया है, उन्होंने इस बात पर संतोष प्रकट किया कि मामला अब समाप्त हो गया है.

विवाद

हेयर ने पाकिस्तान के खिलाड़ियों पर गेंद से छेड़छाड़ करने आरोप लगाते हुए इंग्लैंड की टीम को पाँच अतिरिक्त रन दे दिए थे जिसके विरोध में पाकिस्तान के खिलाड़ी मैदान छोड़कर चले गए थे.

लंबी चली तकरार के बाद पाकिस्तान की टीम मैदान पर लौटने को तैयार नहीं हुई, मैच अधूरा ही रहा लेकिन हेयर ने इंग्लैंड को विजेता घोषित कर दिया.

इसके बाद टेस्ट क्रिकेट खेलने वाले दस देशों की एक बैठक में तय किया गया कि आईसीसी को हेयर पर विश्वास नहीं रहा इसलिए उन्हें अंपायरों के पैनल से हटा दिया जाए.

इंज़माम पर लगा गेंद से छेड़छाड़ का इल्ज़ाम तो वापस ले लिया गया लेकिन 'खेल को बदनाम करने के जुर्म में' उन्हें चार मैचों के लिए प्रतिबंधित कर दिया गया था.