रविवार, 07 अक्तूबर, 2007 को 18:13 GMT तक के समाचार
भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच सात एक दिवसीय मैचों की सिरीज़ का चौथा मैच सोमवार को चंडीगढ़ में खेला जाएगा. गेंदबाज़ी, बल्लेबाज़ी और फ़ील्डिंग के अलावा टीम के सीनियर खिलाड़ियों पर भी दबाव होगा.
इस सिरीज़ में ऑस्ट्रेलिया की टीम दो मैच जीतकर 2-0 से आगे हैं. जबकि एक मैच बारिश के कारण पूरा नहीं हो पाया था.
चंडीगढ़ वनडे में दबाव भारत पर तो होगा ही, तीन वरिष्ठ खिलाड़ियों पर कुछ ज़्यादा होगा. ख़ासकर उस स्थिति में जब प्रमुख चयनकर्ता दिलीप वेंगसरकर ने वरिष्ठ खिलाड़ियों से कहा है कि वे टीम में अपनी जगह पक्की ना समझे.
ट्वेन्टी 20 विश्व कप से अलग रहे सचिन तेंदुलकर और राहुल द्रविड़ ने अभी तक सिरीज़ में प्रभावित नहीं किया है जबकि सौरभ गांगुली को अभी बल्लेबाज़ी करने का मौक़ा ही नहीं मिला है.
संभावना है कि चंडीगढ़ वनडे में सौरभ गांगुली खेलेंगे क्योंकि गौतम गंभीर अभ्यास के दौरान घायल हो गए हैं. हालाँकि गौतम गंभीर ने भी सिरीज़ में निराश ही किया है.
निराशा
रॉबिन उथप्पा ने भी टीम की हार का ठीकरा बल्लेबाज़ों के सिर पर ही फोड़ा है. उन्होंने स्वीकार किया कि युवराज सिंह के अलावा बल्लेबाज़ों ने निराश किया है.
उन्होंने माना कि ट्वेन्टी 20 के बाद टीम 50-50 ओवरों के मैच को तेज़ी से नहीं अपना पाई है. उथप्पा ने कहा, "हमने टीम को निराश किया है. ये दबाव की बात नहीं ज़िम्मेदारी की बात है."
दूसरी ओर 50 ओवरों के मैच की विश्व विजेता ऑस्ट्रेलिया की टीम अगर चौथा वनडे जीत जाती है तो कम से कम वह सिरीज़ हार नहीं सकती.
दो वनडे मैचों में भारत को भारत की धरती पर हराकर ऑस्ट्रेलियाई टीम के हौसले बुलंद हैं.
आक्रमक तेवर
तीनों एक दिवसीय मैचों में 300 के आसपास स्कोर खड़ा करके उसके बल्लेबाज़ों ने अपना शानदार फ़ॉर्म तो दिखाया ही है गेंदबाज़ों ने भी निराश नहीं किया है.
चंडीगढ़ वनडे में नाथन ब्रैकेन की टीम में वापसी हो सकती है. कप्तान रिकी पोंटिंग ने एक बार फिर भारत से कहा है कि वह शब्दों की लड़ाई छोड़कर अपने खेल पर ध्यान दे.
पोंटिंग का इशारा एस श्रीसंत की ओर था. जिन्होंने अभी तक सिरीज़ में विकेट तो आठ लिए हैं लेकिन रन भी ख़ूब दिए हैं.
अभी तक के मैचों के दौरान उनकी मैथ्यू हेडन और एंड्रयू साइमंड्स के साथ कई बार तू-तू मैं मैं हो चुकी है.
हालाँकि रॉबिन उथप्पा ने टीम के व्यवहार का बचाव किया और कहा कि टीम को पता है कि आक्रमक होने की सीमा कहाँ तक होती है.