क्रिकेट पर पैसे की बरसात और हॉकी की पूछ नहीं, इसको लेकर भारतीय हॉकी खिलाड़ी बेहद नाराज़ हैं.
भारतीय हॉकी टीम के कोच जोआकिम कारवाल्हो सरकारों के सौतेले व्यवहार से बेहद आहत हैं.
भारतीय क्रिकेट टीम ट्वेन्टी-20 विश्व कप जीतकर दक्षिण अफ़्रीका से स्वदेश लौटी है.
दुनिया के सबसे मालदार खेल संगठनों में से एक भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड यानी बीसीसीआई ने तो खिलाड़ियों के लिए मोटी रकम का ऐलान किया ही, अनेक राज्य सरकारों ने भी खिलाड़ियों को लाखों रुपए देने की घोषणा कर डाली है.
'सौतेला व्यवहार'
कारवाल्हो हॉकी के साथ राज्य सरकारों के 'सौतेले व्यवहार' से बेहद आहत हैं.
उन्होने मीडिया से बातचीत में कहा,'' हमें क्रिकेट से कोई आपत्ति नहीं है. हम सरकारों के रुख़ से आहत हैं. जब क्रिकेट खिलाड़ियों को ट्वेन्टी-20 विश्व कप जीतने पर सरकार लाखों रुपए दे सकती है तो फिर हॉकी खिलाड़ियों को क्यों नहीं?''
कोच का कहना है कि भारतीय टीम ने हाल ही में चेन्नई में अजेय रहते हुए दक्षिण कोरिया और पाकिस्तान जैसी मजबूत टीमों की मौजूदगी में एशिया कप जीता, यह उपलब्धि कम नहीं है.
उनका कहना था, '' प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी ने हमें जीत के लिए मुबारकबाद दी, लेकिन राज्य सरकारों ने हमारी सुध तक नहीं ली.''
उन्होंने कहा कि एयर इंडिया ने क्रिकेटरों को समयपूर्व प्रोन्नति और अन्य सुविधाएँ देने का ऐलान किया, जबकि इससे जुड़े छह हॉकी खिलाड़ियों को भुला दिया गया.
नागरिक उड्डयन मंत्री प्रफुल्ल पटेल ने मंगलवार को एयर इंडिया से जुड़े छह क्रिकेटरों को समयपूर्व प्रोन्नति और उनके परिवारवालों को पाँच साल तक एयर इंडिया के विमानों में मुफ़्त यात्रा की सुविधा देने की घोषणा की थी.
'हॉकी के साथ भेदभाव'
पूर्व हॉकी कप्तान असलम शेर ख़ान ने बीबीसी से बातचीत में कहा कि हॉकी खिलाड़ियों की व्यथा जायज़ है. एशिया कप जीतने वाले खिलाड़ियों को भी पर्याप्त सम्मान और इनाम मिलना चाहिए.
पूर्व ओलंपियन जफ़र इक़बाल ने कहा कि क्रिकेट की तुलना हॉकी से नहीं की जानी चाहिए, लेकिन हॉकी खिलाड़ियों को उचित सम्मान दिया जाना चाहिए.
उन्होंने कहा कि हॉकी में गिरावट की एक वजह इसमें पैसे की कमी का होना भी है.
भारतीय हॉकी संघ के अध्यक्ष केपीएस गिल ने बीबीसी से बातचीत में कहा कि क्रिकेट अमीर खेल है.
उनका कहना था कि ये दुख की बात है कि हमारी सरकार और नेता केवल एक ही खेल को जानते हैं और वह है क्रिकेट.
केपीएस गिल का कहना था कि हम भारतीयों को इस भेदभाव का विरोध करना चाहिए.