गुरुवार, 09 अगस्त, 2007 को 20:33 GMT तक के समाचार
भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) और इंडियन क्रिकेट लीग (आईसीएल) के बीच गरमाती राजनीति में रेलमंत्री लालू प्रसाद यादव भी कूद पड़े हैं.
गुरुवार को उन्होंने साफ़ कर दिया है कि वे आईसीएल के लिए 'बैटिंग' करने के मूड में हैं और घोषणा कर दी कि वे आईसीएल की प्रतियोगिताओं के लिए रेलवे के स्टेडियम उपलब्ध करवाने को तैयार हैं.
ऐसा नहीं है कि लालू प्रसाद यादव अचानक ही क्रिकेट की राजनीति में आ गए हैं. वे कई बरसों से बिहार क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष हैं.
इससे पहले पूर्व मुख्यमंत्री कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने भी आईसीएल के पक्ष में बयान जारी करके क्रिकेट की राजनीति को हवा दी थी. उन्होंने कहा था कि आईसीएल को भी बराबरी से मौक़ा दिया जाना चाहिए.
लालू प्रसाद यादव और दिग्विजय सिंह दोनों के बयान को बीसीसीआई अध्यक्ष शरद पवार की मुश्किलें बढ़ाने वाला माना जा रहा है.
उल्लेखनीय है कि ज़ी टेलीफ़िल्म्स के चेयरमैन सुभाष चंद्रा के एस्सेल ग्रुप ने आईसीएल का गठन किया है और बीसीसीई इसका विरोध कर रही है.
दो दिन पहले ही बीसीसीआई ने खिलाड़ियों को धमकी देने के अंदाज़ में बताया है कि यदि वे आईसीएल से जुड़े तो न उन्हें बीसीसीआई से सुविधाएँ मिलेंगी और न वे देश के लिए खेल सकेंगे.
लालू की तारीफ़
लालू प्रसाद यादव दिल्ली में अचानक ही क्रिकेट की राजनीति में कूद पड़े.
उन्होंने कहा कि आईसीएल का गठन तो क्रिकेट और खिलाड़ियों दोनों के लिए अच्छा है.
उन्होंने आईसीएल की ट्वेंटी20 प्रतियोगिता के लिए रेलवे के स्टेडियम उपलब्ध करवाने की घोषणा भी कर दी है.
समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार उन्होंने कहा, "यह तो अच्छी शुरुआत है. इससे प्रतियोगिता को बढ़ावा मिलेगा और अच्छे खिलाड़ी प्रोत्साहित होंगे."
उनका कहना था कि बीसीसीआई के समानांतर एक क्रिकेट लीग के शुरु होने से उन लोगों को मौक़ा मिल सकेगा जो ये शिकायत करते हैं कि उनका चयन नहीं हुआ या उनको अनदेखा कर दिया गया.
यह पूछने पर कि क्या यह शरद पवार और सुभाष चंद्रा के बीच की लडाई है, लालू प्रसाद यादव ने सवाल को अनदेखा करते हुए कहा, "प्रतियोगिता हमेशा अच्छी होती है, इससे अच्छे खिलाड़ी पैदा होंगे."
उल्लेखनीय है कि बीसीसीआई के अधिकारी खिलाड़ियों को चेतावनी दे रहे हैं कि यदि वे आईसीएल से जुड़ते हैं तो इसका मतलब यह होगा कि वे बीसीसीआई के साथ नहीं हैं.