कोलकाता हाई कोर्ट ने भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड यानी बीसीसीआई के पूर्व अध्यक्ष जगमोहन डालमिया को निलंबित करने के बोर्ड के फ़ैसले पर रोक लगा दी है.
अदालत ने डालमिया को निर्देश दिया है कि वे बंगाल क्रिकेट एसोसिएशन के चुनाव में खड़े हो सकते हैं.
पिछले साल दिसंबर में शरद पवार की अध्यक्षता वाले भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ने वित्तीय अनियमितता का आरोप लगाते हुए जगमोहन डालमिया को निलंबित कर दिया था.
जगमोहन डालमिया ने कोलकाता हाई कोर्ट में बीसीसीआई के इस फ़ैसले के ख़िलाफ़ अपील की थी.
फ़ैसला
कोलकाता हाई कोर्ट की जस्टिस इंदिरा बैनर्जी ने कहा कि जिस नियम का हवाला देते हुए डालमिया को निलंबित किया गया था, उस नियम का रजिस्ट्रेशन तक नहीं हुआ है. इस कारण वो ग़ैर क़ानूनी है.
इस फ़ैसले के बाद जगमोहन डालमिया 28 जुलाई को होने वाले बंगाल क्रिकेट एसोसिएशन के चुनाव में खड़े हो सकते हैं.
जस्टिस इंदिरा बैनर्जी ने अपने फ़ैसले में कहा है कि डालमिया बीसीसीआई या क्रिकेट एसोसिएशन का चुनाव लड़ने के लिए स्वतंत्र हैं.
बीसीसीआई से निलंबित किए जाने के बाद जगमोहन डालमिया ने बंगाल क्रिकेट एसोसिएशन का अध्यक्ष पद छोड़ दिया था. इसके बाद कोलकाता के पुलिस आयुक्त प्रसून मुखर्जी इस पद पर निर्विरोध चुन लिए गए थे.
हालाँकि पिछले साल जुलाई में हुए चुनाव में वे जगमोहन डालमिया से हार गए थे. इस बार भी वे बंगाल क्रिकेट एसोसिशन के अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ रहे हैं.
आरोप
बीसीसीआई ने जगमोहन डालमिया पर 1996 के विश्व कप मैचों के आयोजन के समय बोर्ड के कोष में करोड़ों रुपयों की धांधली का आरोप लगाया था.
साथ ही उन पर भारतीय उप महाद्वीप में हुए विश्व कप के आयोजन के लिए बनी भारत-पाकिस्तान-श्रीलंका की समिति के खातों में भी धांधली के आरोप लगे थे.
इस संबंध में बीसीसीआई ने पहले जो नोट तैयार किया था, उसके अनुसार लेखाकारों ने बताया है कि कई बार बिना उचित दस्तावेज़ पेश किए खाते से रुपए निकाले गए.
जगमोहन डामलिया ऐसे सभी आरोपों का खंडन करते रहे हैं और कहते हैं कि बोर्ड के कुछ सदस्य उन्हें बदनाम करने की साज़िश कर रहे हैं.