गुरुवार, 19 जुलाई, 2007 को 14:56 GMT तक के समाचार
जेमी लिलीव्हाइट
भारतीय टीम के स्टार खिलाड़ियों के बीच श्रीसंत जैसे युवा क्रिकेटरों के लिए ये कतई आसान नहीं कि वे मीडिया की सुर्ख़ियाँ बटोरें. लेकिन श्रीसंत कुछ अलग हैं. अलग इसलिए क्योंकि उन्होंने अपनी एक पहचान बनाई है.
एक तेज़ गेंदबाज़, जो काफ़ी आक्रमक है. गेंद के साथ-साथ विपक्षी खिलाड़ियों पर दबाव बनाने के लिए कभी-कभी कड़वी बातें बोलने में भी सक्षम हैं श्रीसंत.
बीबीसी स्पोर्ट्स के साथ बातचीत में श्रीसंत ने कहा, "अगर मैं अपने पिताजी के ख़िलाफ़ भी गेंदबाज़ी करूँ तो गेंद फेंकते समय मैं इतनी तेज़ी से दौड़ूँगा जैसे वे मेरे सबसे बड़े दुश्मन हों."
पिछले साल मार्च में इंग्लैंड के ख़िलाफ़ नागपुर में अपना टेस्ट करियर शुरू करने वाले श्रीसंत ने पहले ही टेस्ट में 95 रन देकर चार विकेट लिए. लेकिन उन्हें ज़्यादा चर्चा मिली दक्षिण अफ़्रीका के दौरे पर.
आंद्रे नेल की आक्रमक गेंदबाज़ी के ख़िलाफ़ उनका छक्का और उसके बाद मैदान पर उनका ख़ास नृत्य लोगों के दिमाग़ पर चढ़ गया.
जवाब
अब श्रीसंत का जवाब सुनिए, वो अपने इसे उत्साह के पीछे क्या वजह बताते हैं, "मेरे माँ-पिताजी ने मुझे यही बताया है कि आप जो भी करो, पूरे उत्साह के साथ करो. मैं भी जो करना चाहता हूँ, उसमें अपना सर्वश्रेष्ठ देना चाहता हूँ."
श्रीसंत का कहना है कि किसी बल्लेबाज़ को परेशान करने की उनकी मंशा नहीं होती, वो तो ऐसे ही हैं. जब वे टेनिस खेलते थे या अन्य खेल- तब भी उनका यही रुख़ रहता था.
श्रीसंत इससे पहले भी इंग्लैंड के दौरे पर आ चुके हैं. लेकिन युवा टीम के सदस्य के रूप में. उस दौरे के बारे में श्रीसंत बताते हैं, "जब मैं 16 साल का था, उस समय आया था. मैंने उस समय आठ मैच खेले थे. लेकिन एक लेग स्पिनर के रूप में. 19 साल की उम्र से मैंने तेज़ गेंदबाज़ी शुरू की."
श्रीसंत के अनुसार तेज़ गेंदबाज़ बनने का फ़ैसला उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के महान गेंदबाज़ डेनिस लिली से मिलने के लिए किया था, जो चेन्नई में तेज़ गेंदबाज़ों के लिए एकेडमी चलाते हैं.
श्रीसंत इंग्लैंड दौरे को यादगार बनाना चाहते हैं. उन्हें पता है कि विश्व कप में हार के बाद भारतीय टीम के लिए इंग्लैंड दौरे का कितना महत्व है.