बुधवार, 18 जुलाई, 2007 को 02:44 GMT तक के समाचार
सचिन तेंदुलकर स्वीकार करते हैं कि लॉर्ड्स के मैदान में इंग्लैंड के ख़िलाफ़ गुरुवार से शुरु हो रहे पहले टेस्ट मैच में यदि वे शतक लगा पाते हैं तो यह एक सपने का सच होने जैसा होगा.
34 साल के सचिन तेंदुलकर टेस्ट मैचों में अब तक 37 शतक लगा चुके हैं लेकिन उनका नाम क्रिकेट के मक्का लॉर्ड्स् में शतक लगाने वालों की सूची में अब तक नहीं है.
लॉर्ड्स में सचिन ने अब तक पाँच टेस्ट मैच खेले हैं और उनका अधिकतम स्कोर 31 रन ही रहा है.
उन्होंने बीबीसी से एक बातचीत में कहा, "यह मेरे लिए एक बहुत महत्वपूर्ण मैदान है. इस मैदान पर सारे बल्लेबाज़ शतक लगाने का सपना देखते हैं और मैं उनसे अलग नहीं हूँ."
सचिन अब तक के सबसे ज़्यादा शतक बनाने वाले खिलाड़ी हैं और उन्होंने 1998 में एमसीसी के ख़िलाफ़ शेष विश्व की टीम से खेलते हुए 125 रन बनाए थे.
वे बताते हैं, "मैंने लॉर्ड्स को पहली बार 1983 के विश्वकप फ़ाइनल के दौरान देखा था, जब भारत की टीम खेल रही थी."
वे याद करते हैं, "तब मैं दस साल का था और जानता नहीं था कि क्या हो रहा है. हालांकि मैं इतना छोटा था कि कुछ समझ पाता लेकिन जश्न मनाने में मैं भी जुटा हुआ था."
वे कहते हैं कि लॉर्ड्स के बीचों बीच होना अपने आपमें महत्वपूर्ण है और कोई भी चाहेगा कि इसका पूरा लाभ उठाया जाए.
सचिन याद करते हैं, "मुझे याद है कि पहली बार मैं यहाँ 14 साल के बच्चे की तरह आया था. तब मैंने नर्सरी छोर पर रखे साइट स्क्रीन के बगल के बैठ कर तस्वीर ख़िंचवाई थी. बच्चों के सपने बड़े होते हैं और मेरे सपनों में से एक यह था कि मैं वहाँ खेल सकूँ."
अपने रिटायर होने के दिन क़रीब होने का संकेत देते हुए उन्होंने कहा, "ऐसा लगता है कि यह मेरा आख़िरी इंग्लैंड दौरा होगा लेकिन इससे कोई ख़ास फ़र्क नहीं पड़ता."
उन्होंने कहा, "ईश्वर ही जानता है कि आगे क्या होना है. इंग्लैंड का पिछला दौरा 2002 में हुआ था, अब 2007 है, इस हिसाब से अगला दौरा 2011 या 2012 में होगा और तब तक टिके रहने के लिए विशेष प्रयास करने होंगे."
अपने भविष्य के कार्यक्रम के बारे में पूछे गए सवाल के बारे में उन्होंने कहा, "मैं अपने लक्ष्य सार्वजनिक नहीं करता. कई चीज़ें हैं जिसे मैं ख़ुद तक सीमित रखता हूँ. इससे मुझे प्रेरणा मिलती है और मैं टीम के लिए बेहतर प्रदर्शन कर सकता हूँ."
उन्होंने कहा कि जिस दिन वे महसूस करेंगे कि वे अपना सौ प्रतिशत नहीं दे पा रहे हैं, उस दिन वे ख़ुद ही मैदान से हट जाएँगे.
उन्होंने कहा कि वे खेल का मज़ा ले रहे हैं और इसीलिए वे मैदान पर डटे हुए हैं. उनका कहना था कि ज़्यादा महत्वपूर्ण बात यह है कि वे इस खेल से प्यार करते हैं.