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गुरुवार, 28 जून, 2007 को 22:02 GMT तक के समाचार

पंकज प्रियदर्शी
बीबीसी संवाददाता, विंबलडन से

सानिया को कुछ नहीं पता..

पत्रकारों और सानिया मिर्ज़ा के खेल पर नज़र रखने वालों की मानें, तो सानिया हार के बाद काफ़ी चिढ़ जाती हैं. चिड़चिड़ेपन में कई बार उटपटांग बातें भी बोल जाती हैं.

अब देखिए ना, नादिया पेत्रोवा के ख़िलाफ़ मैच के दौरान सानिया में वो जोश दिखा ही नहीं, जो पहले दौर में दिख रहा था. सर्विस भी कमज़ोर और रिटर्न भी ताक़तवर नहीं.

इसके बलबूते तो 11वीं वरीयता प्राप्त खिलाड़ी को आप क्या हराएँगे. लगातार ग़लतियाँ करने से चिढ़ी सानिया ने एक बार तो चिल्ला कर कहा- आई डॉन्ट अंडरस्टैंड.

यानी मुझे कुछ पता नहीं चल रहा है कि क्या हो रहा है. भई, अगर कुछ पता नहीं चल रहा है तो ग़लती किसकी है. शीर्ष खिलाड़ियों से भिड़ने से पहले कुछ तो पता लगाना ही चाहिए.

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हवा से नाराज़गी

लिएंडर पेस और मार्टिन डैम की जोड़ी विंबलडन के चौथे दिन जब सुबह-सुबह मैदान में उतरी, तो बादल छाए हुए थे और हवा भी तेज़ चल रही थी.

लिएंडर पेस और डैम की जोड़ी पहले सेट में काफ़ी सावधानी पूर्वक खेल रही थी. मैदान पर हमेशा हँसमुख रहने वाले लिएंडर ने जब अपनी सर्विस पर डबल फ़ॉल्ट किया, तो उन्हें ग़ुस्सा आ गया.

उन्होंने अपना ग़ुस्सा भी निकाला. लेकिन किस पर....हवा पर. तेज़ हवा के कारण उनकी सर्विस स्विंग हो रही थी और नेट से टकरा कर जब उन्हीं के कोर्ट पर गिर पड़ी, तो ग़ुस्सा तो स्वभाविक ही थी.

पेस ने हवा पर ग़ुस्सा निकाला लेकिन खेल पर क़ाबू बनाए रखा और आख़िरकार जीत उनकी हो ही गई.

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टेनिस के कोर्ट पर क्रिकेट समर्थक

पाकिस्तान के एसाम उल हक़ क़ुरैशी काफ़ी लोकप्रिय हो चुके हैं. पाकिस्तान के साथ-साथ भारतीयों में भी. गुरुवार को उनका मैच था रूस के मरात साफ़िन के साथ.

क़ुरैशी से सबको उम्मीद तो थी. लेकिन साफ़िन को कोई कम कैसे आँक सकता था. उनका मैच देखने के लिए भारी संख्या में लोग जुटे थे.

कुछ भारतीय तो उसी समय एक अन्य कोर्ट पर पेस और डैम का मैच नहीं देख रहे थे बल्कि क़ुरैशी के मैच का आनंद उठा रहे थे. मैच के बाद पाकिस्तानी क्रिकेट टीम की शर्ट पहने कुछ लोग मुझे मिले.

मैंने उत्सुकतावश उनसे पूछ लिया- भैया टेनिस में क्रिकेट का क्या घालमेल है. एक ने बड़े निर्दोष भाव से कहा- पाकिस्तान में टेनिस को बढ़ावा नहीं दिया जाता.

फिर अपनी शर्ट की ओर देख कर कहा- अब देखिए ना, मैं भी क्रिकेट टीम की शर्ट पहन कर टेनिस मैच देख रहा हूँ. क्रिकेट के आगे किसी और खेल की किसी को फ़िक्र ही नहीं.

अब आप ही बताइए कौन फ़िक्र करे. क्रिकेट की. नहीं...नहीं...नहीं...अन्य खेलों की.

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पार्टनर से पंगा

सानिया मिर्ज़ा के हर मैच में महेश भूपति आपको स्टैंड में बैठे मिल जाएँगे. लेकिन लिएंडर के मैच में वो नहीं दिखते. ख़ैर अब तो दोनों में प्रतिद्वंद्विता भी है.

लेकिन इस विंबलडन में महेश भूपति डबल्स में नहीं खेल रहे. आप पूछेंगे क्यों. जानकारी ये है कि उनके पार्टनर रादेक स्टिएपानेक और उनमें विवाद हो गया है.

विवाद किस बात पर हुआ और कैसे हुआ- ये तो पता नहीं. लेकिन इतना तो तय है कि इसी विवाद के कारण भूपति डबल्स में नहीं खेल रहे क्योंकि इतने कम समय में उन्हें कोई पार्टनर मिलता भी कैसे.

अब पिछले दिनों सिंगल्स मैच में अपने पार्टनर स्टिएपानेक का उत्साह बढ़ाने भूपति स्टैंड में बैठे थे. लेकिन एकाएक ऐसा क्या हो गया कि विवाद खड़ा हो गया.

ख़ैर जाने दीजिए अब तो इस विंबलडन में भूपति को मिक्स्ड डबल्स से ही काम चलाना पड़ेगा और मिक्स्ड डबल्स में उनकी पार्टनर हैं सानिया मिर्ज़ा.