शनिवार, 23 जून, 2007 को 01:09 GMT तक के समाचार
भारत की टेनिस स्टार सानिया मिर्ज़ा विंबलडन को लेकर ख़ासी उत्साहित हैं, वे इसे करियर का एक अहम मुक़ाबला मानती हैं.
बीबीसी स्पोर्ट्स से एक ख़ास बातचीत में उन्होंने कहा, "भारत में हर खिलाड़ी पर काफ़ी दबाव होता है कि वह अच्छा प्रदर्शन करे, मुझसे ज़्यादा क्रिकेटरों पर होता है लेकिन मैं उससे बचने की कोशिश करती हूँ लेकिन उस दबाव से पूरी तरह बच पाना संभव नहीं होता."
घुटने की चोट से हाल ही में उबरी सानिया मिर्ज़ा का प्रदर्शन पिछले कुछ समय से बहुत अच्छा नहीं रहा है लेकिन वे विंबलडन में बेहतरीन प्रदर्शन की उम्मीद लगा रही हैं.
सर्जरी के बाद नौ सप्ताह तक आराम करने के बाद उन्होंने फ्रेंच ओपन में पहले दौर की जीत के साथ वापसी की लेकिन उसके बाद उनकी भिडंत एना इवानोविच से हुई और वे हार गईं.
सानिया बताती हैं, "जब मैंने फ्रेंच ओपन का पहला मैच जीता तो मेरा फ़ोन लगातार बजता रहा, लोग बहुत उत्साहित थे. मैं ढाई महीने से खेली नहीं थी, सीधे पेरिस पहुँच गई और सर्जरी के बाद खेलना काफ़ी कठिन होता है."
"मुझे सब कुछ बिल्कुल शून्य से शुरू करना पड़ा, मेरा दायाँ पैर बाएँ पैर के मुक़ाबले बहुत ही कमज़ोर लग रहा था. सर्जरी के बाद का दौर सचमुच बहुत कठिन रहा है."
ग्रास कोर्ट
2003 ने जूनियर विंबलडन की जूनियर चैंपियन रहीं सानिया का कहना है कि "घास के कोर्ट मेरे खेल के अनुरूप हैं."
इसके अलावा विंबलडन में सानिया का उत्साह बढ़ाने के लिए बड़ी संख्या में भारतीय मूल के प्रशंसक भी होंगे, वे कहती हैं, "इंग्लैंड में कितने सारे भारतीय रहते हैं, मेरे चाचा और मौसी भी लंदन में रहते हैं."
"मेरी सबसे अच्छी दोस्त लैंकास्टर में रहती है जिसे मैंने आठ महीनों से नहीं देखा है, इस बार मैं उससे ज़रूर मिलूँगी."
सानिया का कहना है कि इंग्लैंड में बहुत सारे भारतीय तो रहते ही हैं और गर्मियों के मौसम में भारत से बहुत बड़ी तादाद में लोग लंदन आते हैं.
विंबलडन के परिचित माहौल के बारे में वे कहती हैं, "ऐसा लगता है मानो मैं भारत में ही खेल रही हूँ."