रविवार, 29 अप्रैल, 2007 को 03:21 GMT तक के समाचार
मोहिंदर अमरनाथ
पूर्व क्रिकेटर
ऑस्ट्रेलिया ने विश्वकप का ख़िताब एक बार फिर जीत लिया है.
जिस तरह से उन्होंने विश्वकप की शुरुआत की थी, उसी अंदाज़ में उन्होंने फ़ाइनल भी खेला और एकतरफ़ा मैच खेलते हुए खिताब जीत ले गए.
ऑस्ट्रेलिया ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाज़ी करने का फ़ैसला किया तो उन्हें पता था कि उन्हें धुँआधार शुरुआत करनी होगी.
उधर श्रीलंका को अपने दो गेंदबाज़ों पर यक़ीन था, चमिंडा वास और मुरलीधरन. पिछले लीग मैचों में उन दोनों को आराम करने का भी मौक़ा दिया गया था.
लेकिन ऑस्ट्रेलियाई ओपनर हेडन और गिलक्रिस्ट तो कुछ और ही तय करके आए थे. हेडन का खेल कुछ अलग सा था.
लेकिन गिलक्रिस्ट तो सूनामी या साइक्लोन की तरह आए और उन्होंने श्रीलंकाई टीम पर क़हर ढा दिया.
उन्होंने पहले तीन ओवरों में जिस अंदाज़ से चमिंडा वास की गेंदों की धुनाई की, उसने बाक़ी गेंदबाज़ों पर भी दबाव बना दिया.
गिलक्रिस्ट ने अपने खेल से एक उदाहरण पेश किया कि किस तरह अच्छे शॉट लगाते हुए वनडे क्रिकेट में बल्लेबाज़ी की जानी चाहिए.
श्रीलंका की पारी आई तो संगकारा और जयसूर्या ने पूरा ज़ोर लगा दिया.
लेकिन ब्रेडहॉक भी दबाव बनाए हुए थे. जयसूर्या का विकेट गिरने के बाद से श्रीलंका के लिए लक्ष्य दूर होता जा रहा था.
मैकग्रा की विदाई
मैकग्रॉ इस विश्वकप के बाद मैदान से विदा हो गए. कोई खिलाड़ी इससे अच्छा तोहफ़ा अपने देश को क्या देता कि वह मैन ऑफ़ द टूर्नामेंट के ख़िताब के साथ विदा हो.
दरअसल मैकग्रॉ, एडम गिलक्रिस्ट और रिकी पॉन्टिंग तीनों ही वो खिलाड़ी हैं जो पिछले तीनों विश्वकप की जीत में भूमिका निभाते रहे हैं.
जिस तरह से विश्वकप के फ़ाइनल मैच में खेल को कम ओवरों में समेटना पड़ा और फिर आख़िरी में खेल ख़त्म करने को लेकर विवाद हुआ, उसे दुर्भाग्यजनक ही माना जाना चाहिए.
लेकिन ऑस्ट्रेलिया ने साबित कर दिया है कि उसे मात देना मुश्किल था और मुश्किल है.
विश्व विजेता के ख़िताब की असली हक़दार वही एक टीम थी और उन्होंने जता दिया है कि इस समय दुनिया में उनके मुक़ाबले की दूसरी कोई टीम मौजूद नहीं है.