श्याम सुंदर
बीबीसी संवाददाता, दिल्ली
विश्वकप जीतने वाली भारतीय टीम के उप कप्तान मोहिंदर अमरनाथ के अनुसार खेल हमेशा खिलाड़ी से बड़ा होता है और सचिन के मामले में भी प्रदर्शन ही आधार होना चाहिए.
मोहिंदर अमरनाथ का कहना है कि अब मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर में टीम को जिताने का दम नहीं बचा है और यह सही समय है जब उन्हें कम-से-कम एकदिवसीय क्रिकेट को अलविदा कह देना चाहिए.
उन्होंने कहा कि अपने हाल के मैचों में सचिन ने कोई बड़ी पारी नहीं खेली है.
उन्होंने ने ये विचार बीबीसी हिंदी सेवा के साप्ताहिक कार्यक्रम 'आपकी बात, बीबीसी के साथ' में व्यक्त किए. चर्चा का विषय था - 'क्या सचिन को लारा से सीख लेते हुए क्रिकेट से सन्यास से ले लेना चाहिए.'
अमरनाथ ने कहा कि इस बात में कोई शक़ नहीं कि सचिन महानतम बल्लेबाज़ हैं पर यह कहना सही नहीं है कि वो टीम में कब तक खेलेंगे इसका फ़ैसला उन पर छोड़ दिया जाए.
उधर कार्यक्रम की दूसरी मेहमान खेल पत्रकार नीरू भाटिया का कहना था कि सचिन में अभी कम से कम दो साल का क्रिकेट बचा है. उनका कहना था कि ये हो सकता है कि उन्हें बीच-बीच मे आराम दिया जाता रहे.
कार्यक्रम में बीबीसी हिंदी के रेडियो श्रोताओं ने भी खुलकर इस मुद्दे पर अपनी राय और सवाल रखे.
बहराइच से एक श्रोता विपिन अग्रवाल का कहना था कि कहीं न कहीं सचिन तेंदुलकर के खेलते रहने के पीछे विज्ञापनों से होने वाली भारी कमाई का लालच जुड़ा है.
विपिन अग्रवाल के सवाल को निराधार भी नहीं माना जा सकता है क्योंकि सदी के महानायक अमिताभ बच्चन के बाद सचिन तेंदुलकर ही वो व्यक्ति हैं जिन्हें टीवी विज्ञापन मे सबसे अधिक दिखाया गया.
अगर पिछले साल की बात करें तो अमिताभ को टीवी विज्ञापनों मे 708 घंटे जगह मिली तो सचिन को भी 121 घंटे मिले जो किसी भी और क्रिकेट खिलाड़ी को मिले समय से काफ़ी अधिक था.
हालांकि कार्यक्रम के दोनों ही मेहमान इस तर्क से सहमत नहीं थे.
'व्यावहारिक होने की ज़रूरत'
लेकिन श्रोताओं में ज़्यादातर का मानना था की सचिन को कब संन्यास लेना चाहिए इसका फ़ैसला करने का हक़ सिर्फ़ उन्हें ही होना चाहिए.
अमरनाथ का जवाब साफ़ था कि इस मुद्दे पर भावुक होने के बजाए भारतीय क्रिकेट को बेहतर बनाने के लिए व्यावहारिक होने की ज़रूरत है.
मेहमानों ने खुलकर कहा कि सुनील गावसकर का जहाँ ये कहना सही है कि ग्रेग चैपल ने भारत की टीम का सत्यानाश कर दिया वहीं भारत का क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड भी इस सत्यानाश के लिए बराबर का ज़िम्मेदार है.
मोहिन्दर अमरनाथ का कहना था कि ऐसा लगता है कि मुख्य चयनकर्ता दिलीप वेंगसरकर ख़ुश नहीं हैं और अगर ऐसा है तो उन्हें यह पद छोड़ देना चाहिए.
मोहिंदर अमरनाथ ने इस बात पर बड़ी हैरानी प्रकट की कि बीसीसीआई ने ये तय किया कि कप्तान कौन होगा. इससे पहले ये काम हमेशा चयन समिति करती आई थी.
उनका साफ़ इशारा था की चयन समिति दबाव मे काम कर रही है. अमरनाथ की नज़र में रवि शास्त्री का मैनेज़र के तौर पर चुनाव निष्पक्ष नही कहा जा सकता.
एक श्रोता ने कार्यक्रम के दौरान सवाल किया कि क्या बीसीसीआई पर उन कंपनियों का दबाव रहता है जिन कंपनियों के विज्ञापन खिलाड़ी करते हैं? इस सवाल के जवाब में अमरनाथ का कहना था कि इस आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता.