http://www.bbcchindi.com

मलय नीरव
दिल्ली से

'विश्व कप के बाद कोच की तलाश'

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड यानी बीसीसीआई के सचिव निरंजन शाह का कहना है कि विश्व कप के बाद बोर्ड ये देखेगा कि कोई अंतरराष्ट्रीय कोच उपलब्ध है या नहीं.

बीबीसी के साथ एक विशेष बातचीत में निरंजन शाह ने कहा कि अब कोच हो या मैनेजर- उन्हें दो साल के लिए नियुक्त किया जाएगा.

उन्होंने बताया कि बांग्लादेश दौरे के लिए मैनेजर बनाए गए रवि शास्त्री को नए फ़ील्डिंग कोच और गेंदबाज़ी कोच मदद करेंगे लेकिन पूर्णकालिक कोच के चयन में अभी थोड़ा समय लगेगा.

कोच के बारे में उन्होंने कहा, “नए कोच के चयन के लिए प्रक्रिया शुरू होगी. विश्व कप के बाद हम देखेंगे कि कोई अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उपलब्ध है या नहीं.”

उनका कहना था, “बोर्ड ने तय किया है कि कोच और मैनेजर का चयन दो वर्षों के लिए होगा. यह हमारी लंबी अवधि की रणनीति है लेकिन फ़िलहाल बांग्लादेश के लिए रवि शास्त्री टीम की कमान संभालेंगे.”

उन्होंने रवि शास्त्री के बारे में कहा, “वो इस काम के लिए अच्छे साबित होंगे. शास्त्री टीम में जोश ला सकते हैं. हमनें उन्हें फ़ील्डिंग और बॉलिंग कोच दिया है.”

निरंजन शाह मानते हैं कि क्षेत्रीय चयन प्रणाली को ख़त्म करने और पूर्णकालिक चयनकर्ता नियुक्त करने में एक साल तक का समय लग सकता है.

वो कहते हैं, "इसके लिए बोर्ड का संविधान बदलना होगा. मौजूदा चयन प्रणाली संविधान से बनी है. इसलिए संविधान बदलने की प्रक्रिया में एक साल तो लग जाएगा."

सचिन का मामला

निरंजन शाह ने कहा कि सचिन और युवराज सिंह से जो स्पष्टीकरण मांगा गया था, वो मामला अब ख़त्म हो गया है.

उन्होंने कहा, "हमलोगों ने उनसे मीडिया में बयान जारी करने के लिए स्पष्टीकरण माँगा था. उन्होंने जवाब दे दिया. अब मामला ख़त्म हो गया है. लेकिन उनकी चिट्ठी में क्या है, ये बता नहीं सकता क्योंकि यह बोर्ड का मामला है. उनका जबाव संतोषजनक है."

निरंजन शाह ने इस बात से इनकार किया कि बड़ा खिलाड़ी होने के कारण सचिन तेंदुलकर पर बीसीसीआई का रूख़ नरम रहा. उन्होंने स्पष्ट किया कि बोर्ड की आचार संहिता सभी खिलाड़ियों पर समान रूप से लागू होती है.

बांग्लदेश दौरे के लिए सुरक्षा इंतज़ामों पर उन्होंने बताया, “मैंने वहाँ के बोर्ड के सीईओ से बात की है और उन्होंने पूरा यकीन दिलाया है कि सुरक्षा कोई समस्या नहीं है.”

उनका कहना था, “हम उनके जवाब से संतुष्ट हैं. जब टीम बाहर जाती है तो सुरक्षा की ज़िम्मेदारी वहाँ की होती है. वैसे सरकार जो भी दिशा निर्देश देगी, हम उसका पालन करेंगे. अगर ज़रूरत पड़ी तो हम सुरक्षा टीम भी भेज सकते हैं.”