शनिवार, 24 मार्च, 2007 को 11:30 GMT तक के समाचार
पंकज प्रियदर्शी,
बीबीसी संवददाता, त्रिनिडाड
वर्ष 2007 के विश्व कप का दरवाज़ा भले ही भारत के लिए अभी तकनीकी रूप से खुला हो, लेकिन ऐसा लगता है कि भारतीय कप्तान राहुल द्रविड़ हार मान चुके हैं.
इस विश्व कप के अब तक के सबसे चर्चित मुक़ाबले में भारतीय टीम को चारों खाने चित्त करने के बाद श्रीलंका के खेमे में खुशी की लहर है.
श्रीलंका की टीम ने ग्रुप मुक़ाबले में अपने सभी मैच जीतकर सुपर-8 में अपनी जगह पक्की कर लिया है. इस मैच में भारत को पानी पिलाने के बाद श्रीलंका की टीम दो अंक लेकर सुपर-8 में जाएगी. अब उसके साथ भारत सुपर-8 में जाए या बांग्लादेश.
वहीं दूसरी ओर भारतीय खिलाड़ी निराशा में डूबे हुए हैं. निराशा ऐसी कि कप्तान राहुल द्रविड़ बांग्लादेश-बरमूडा मैच से पहले ही हार मान चुके नज़र आते हैं.
मैच के बाद प्रेस कॉन्फ़्रेंस में द्रविड़ ने कहा, “मैं मानता हूँ कि हम विश्व कप में बढ़िया नहीं खेले और अब मैं बांग्लादेश-बरमूडा मैच के बारे में नहीं सोचना चाहता.”
उधर श्रीलंका के कप्तान महेला जयवर्धने कहते हैं कि उन्होंने भारतीय टीम के ख़िलाफ़ अच्छी रणनीति बनाई थी जो काम आई.
उन्होंने कहा, “ग्रुप मैचों में टीम के पास एक योजना थी और योजना पूरी तरह कारगर रही. मुझे ख़ुशी है कि खिलाड़ियों ने इस योजना पर अमल किया.”
द्रविड़ ने हार तो स्वीकर की लेकिन विश्व कप के स्वरूप पर ज़रूर सवाल खड़ा किया. उन्होंने कहा कि पिछले विश्व कपों में टीम के चार या पाँच मैच होते थे लेकिन इस विश्व कप में तो एक मैच में आप ख़राब खेले और प्रतियोगिता से बाहर.
कप्तानी के बारे में सवाल पूछे जाने पर द्रविड़ ने कहा, “ मैं नहीं जानता कि कप्तानी के बारे में क्या होगा. क्योंकि मुझे विश्व कप तक के लिए कप्तान चुना गया था. अब आगे तो जिसे फ़ैसला करना है वो फ़ैसला करेगा.”
उधर भारतीय टीम के कोच ग्रेग चैपल ने कहा कि टीम ने योजना तो अच्छी बनाई थी लेकिन वो चल नहीं पाई.
उन्होंने कहा कि प्रशंसकों की ओर से लगातार बढ़ते दबाव के कारण खिलाड़ियों के प्रदर्शन पर असर पड़ा है.
दूसरी ओर अपनी टीम के सुपर-8 में पहुँच जाने से फूले नहीं समा रहे जयवर्धने ने कहा कि अगर उनकी टीम सुपर-8 के तीन-चार मैच जीत लेती है तो उनके सेमी फ़ाइनल में पहुँचने की उम्मीद बन सकती है.