शुक्रवार, 23 मार्च, 2007 को 12:53 GMT तक के समाचार
पंकज प्रियदर्शी
बीबीसी संवाददाता, त्रिनिडाड से
पत्रकारों और खिलाड़ियों के अजीब रिश्ते होते हैं. कई पत्रकार तो भारतीय टीम का नियमित दौरा कवर करने के कारण उनसे ऐसे घुले-मिले होते हैं कि लगता है उनके सच्चे साथी हों.
गुरुवार को भारतीय टीम के अभ्यास सत्र के दौरान बड़ी संख्या में पत्रकार मौजूद थे. थोड़ी बारिश के कारण काफ़ी उमस थी और प्यास कुछ ज़्यादा ही लग रही थी.
हम लोग पवेलियन के साथ लगे स्टैंड में आसन जमाए हुए थे. तभी मुनाफ़ पटेल दिखे. एक साथी पत्रकार से ऐसे उलझे, जैसे जन्म-जन्म के दोस्त हों.
पत्रकारों को अच्छा मौक़ा हाथ लगा. उन्होंने मुनाफ़ से पानी की फ़रमाइश की. मुनाफ़ पवेलियन में गए और एक-दो नहीं पानी की चार बोतल लेकर आए और ये भी कहा- और चाहिए तो बताना.
भाग-दौड़ से थके और गर्मी से बेहाल पत्रकारों ने पानी से गला तर किया और मुनाफ़ को कोटि-कोटि धन्यवाद किया. और मुनाफ़..उन्होंने हँस कर एक बार फिर कहा- और पानी चाहिए तो बता देना.
सहवाग की मेहनत
बरमूडा के ख़िलाफ़ मैच में शतक ठोंकने के बावजूद भी सहवाग पर दबाव क़ायम है. बड़ी टीम के ख़िलाफ़ जब तक वे रन नहीं बनाएँगे उनका नंबर नहीं बढ़ पाएगा.
टीम के अभ्यास सत्र में उनपर ये दबाव स्पष्ट दिख रहा था. सारे खिलाड़ी जहाँ एक-दूसरे के साथ अभ्यास में जुटे थे, वहीं सहवाग के साथ थे टीम के सहायक कोच इयन फ़्रेज़र.
नेट पर गेंदों पर जम कर प्रहार कर रहे सहवाग ने जब लगाता आकर्षक शॉट लगाए तो फ़्रेज़र उनके पास आए और बोले- तुमने पहले मैच में इस तरह का शॉट ऐसे लगाया था और फिर इशारे से शॉट का गुर सिखाने लगे.
सहवाग भी उन्हें समझाने की कोशिश कर रहे थे. फ़्रेजर के साथ लंबे समय तक सहवाग जूझते रहे.
उनका बल्ला नेट पर ऐसे चल रहा था जैसे उनके सामने अभी से ही श्रीलंका के गेंदबाज़ सामने आ गए हों.
मूडी की सोच
विश्व कप के दौरान हर टीम का कोई खिलाड़ी या कोच अभ्यास सत्र के पहले या बाद में एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस करता है.
भारतीय टीम के खिलाड़ी तो किसी से अलग से बात नहीं कर रहे इसलिए भारतीय मीडिया को तो जैसे इस कॉन्फ़्रेंस की तलाश ही रहती है.
हालाँकि दूसरी टीमों का हाल ऐसा नहीं है. पहले श्रीलंका के कोच टॉम मूडी प्रेस कॉन्फ़्रेंस के लिए पहुँचे तो मुश्किल ये हुई कि पत्रकारों के माइक कहाँ रखे जाएँ
क्योंकि नेट के ठीक बाहर पत्रकारों का जमावड़ा था. ख़ैर पत्रकार इससे पहले सोचते, टॉम मूडी ने ख़ुद पहल की और एक टेबल ख़ाली करवाई और फिर पत्रकारों से ख़ूब बात की.
और....द्रविड़ की प्रेस कॉन्फ़्रेंस
इसके थोड़ी देर पहले भारतीय टीम भी क्वींस पार्क ओवल के मैदान में पहुँची. भारतीय कप्तान को अभ्यास से पहले पत्रकारों से बात करनी थी.
लेकिन ये क्या हुआ जिन आयोजकों ने मूडी के प्रेस कॉन्फ़्रेंस को लेकर कोई तैयारी नहीं की थी, वही द्रविड़ के लिए कुर्सियाँ और टेबल लगाने में जुट गए. और तो और उन्होंने रस्सी से एक सुरक्षा घेरा भी लगा दिया.
लेकिन उनकी मेहनत काम ना आई. क्योंकि द्रविड़ ने पत्रकारों से बातचीत के लिए पवेलियन से लगा स्टैंड चुना और हमारे बीच आकर बैठें.
फिर पत्रकार कैसे उन पर टूटे- ये कहानी रहने की दीजिए.