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सोमवार, 12 मार्च, 2007 को 18:53 GMT तक के समाचार

सुनंदन लेले
वरिष्ठ क्रिकेट पत्रकार

अनुभव और जोश चला, तो जीतेगा भारत

भारतीय टीम की तैयारी काफ़ी अच्छी है और जो संकेत मिल रहे हैं उससे तो यही लगता है कि भारतीय टीम की दावेदारी अच्छी है.

इस विश्व कप में भी यही लग रहा है कि बल्लेबाज़ों का पलड़ा भारी रहेगा और इस हिसाब से भारतीय बल्लेबाज़ी ज़बरदस्त है, बड़ी मज़बूत है और उसमें गहराई भी है.

इस हिसाब से मुझे लग रहा है कि भारतीय टीम इस विश्व कप में ज़रूर अच्छा करके दिखाएगी. सलामी बल्लेबाज़ों में रॉबिन उथप्पा और सौरभ गांगुली की बात करें, तो इस जोड़ी में जोश और अनुभव का अनोखा मिश्रण है.

भारत का मध्यक्रम भी काफ़ी मज़बूत हो चुका है. सचिन तेंदुलकर और राहुल द्रविड़ जैसे खिलाड़ी मध्यक्रम में हैं. साथ ही युवराज सिंह भी इसी क्रम में आएँगे.

इसके साथ भारतीय टीम में महेंद्र सिंह धोनी जैसे खिलाड़ी भी हैं और ऐसा खिलाड़ी पिछले विश्व कप में भारतीय टीम के साथ नहीं था.

ऑल राउंड टीम

इस आधार पर कहा जा सकता है कि इस समय भारतीय बल्लेबाज़ी में जो गहराई है, वो सचमुच की गहराई है ना कि सिर्फ़ क़ाग़ज़ों वाली.

संभावना ये है कि भारतीय टीम तीन तेज़ गेंदबाज़ और एक स्पिनर को लेकर खेलेगी. हालाँकि पिछले विश्व कप में भी ज़हीर ख़ान, अजित अगरकर और अनिल कुंबले भी थे, लेकिन अंतर इस बार अनुभव का है.

यानी इस बार ये खिलाड़ी और अनुभवी होकर मैदान में आएँगे. ज़हीर ख़ान ने तो कहा ही है कि पिछली बार उनके पास कम अनुभव था लेकिन इस बार वे अनुभव लेकर आए हैं.

वैसे भी टीम में अब जोश और संयम का संतुलन रखना पड़ता है. जो अब ज़हीर ख़ान, अगरकर, कुंबले और हरभजन सिंह के रूप में भारतीय टीम के पास है.

जहाँ तक फ़ील्डिंग की बात है, कुछ समस्या ज़रूर है. भारतीय टीम में सात-आठ खिलाड़ी ऐसे हैं, जो 30 वर्ष से ऊपर के हैं. उनकी फ़ील्डिंग में थोड़ी समस्या ज़रूर है.

लेकिन सबसे अहम होगा आख़िरी के 10 ओवर में रन रोकना. यानी भारतीय टीम आख़िरी के 10 ओवर में विपक्षी टीम को कितना कम रन बनाने देगी और इसमें फ़ील्डरों की भूमिका अहम होगी.

इस विश्व कप में भारत को ऑस्ट्रेलिया से तगड़ी चुनौती मिलने वाली है. वे मौजूदा चैम्पियन हैं और चाहेंगे कि लगातार तीसरी बार विश्व कप जीतें.

सचिन-युवराज से उम्मीदें

इसके अलावा न्यूज़ीलैंड और दक्षिण अफ़्रीका की टीम भी अच्छा प्रदर्शन कर सकती है. मेरे हिसाब से सेमी फ़ाइनल में ऑस्ट्रेलिया, भारत, न्यूज़ीलैंड और दक्षिण अफ़्रीका के आने की पूरी संभावना है.

जहाँ तक भारतीय टीम के खिलाड़ियों की बात है, तो मैं मानता हूँ कि सचिन तेंदुलकर और युवराज सिंह के प्रदर्शन पर ख़ास नज़र होगी.

मैं सचिन तेंदुलकर की बात इसलिए करता हूँ क्योंकि कहा जाता है कि बड़ा खिलाड़ी, जब बड़ा स्टेज़ आता है तो बड़ा प्रदर्शन कर दिखाता है.

वैसे भी सचिन तेंदुलकर विश्व कप में अच्छा खेलते रहे हैं. जहाँ तक युवराज सिंह की बात है उन्होंने पिछले विश्व कप में भी अच्छा प्रदर्शन किया था.

अब उनको मालूम है कि ये विश्व कप उनके नाम हो सकता है और इस विश्व कप में वे छा जाना चाहते है. तो सचिन का अनुभव और युवराज का जोश चला तो भारतीय टीम सबसे बड़ी दावेदार हो सकती है.