रविवार, 11 मार्च, 2007 को 15:09 GMT तक के समाचार
मलय नीरव
दिल्ली से
वर्ष 1983 की विश्व विजेता भारतीय टीम के सदस्य रहे मोहिंदर अमरनाथ का कहना है कि इस विश्व कप में वेस्टइंडीज़ की पिचों की सबसे अहम भूमिका होगी.
उनका कहना है कि अगर विश्व कप के मैचों में पिचें उसी तरह की हुईं, जैसा अभ्यास मैचों में थी, तो विश्व कप में रोचक मैच देखने को कम ही मिलेंगे.
बीबीसी के साथ बातचीत में उन्होंने कहा, "वेस्टइंडीज़ की पिचों में काफ़ी बदलाव हुआ है. इतना बड़ा टूर्नामेंट है और पिचें गुणवत्ता वाली नहीं हुई, तो कई टीमों को मुश्किल हो सकती है. अगर वेस्टइंडीज़ की पिचें उसी तरह की होंगी, जैसा अभ्यास मैचों में दिखा है तो मैं नहीं समझता कि इस विश्व कप में रोचक मैच देखने को मिलेंगे."
मोहिंदर अमरनाथ का कहना है कि वेस्टइंडीज़ में नई विकेट बनाई गई है और नई पिचों को सेट होने में एक साल लगता है.
भारतीय टीम के दावे के बारे में उन्होंने कहा कि क़ाग़ज़ पर तो भारत की टीम अनुभव में सबसे ऊपर आ सकती है. लेकिन खेल तो मैदान पर खेला जाता है ना कि क़ाग़ज़ों पर.
शुरुआत पर नज़रें
मोहिंदर अमरनाथ ने कहा, "इस पर काफ़ी कुछ निर्भर करता है कि भारत की टीम किस हिसाब से प्रतियोगिता की शुरुआत करती है. प्रैक्टिस मैच में तो भारत अच्छा खेला है लेकिन प्रैक्टिस मैच की बात अलग होती है. लेकिन विश्व कप में खेलना अलग बात होती है."
उन्होंने कहा कि भारत के अनुभवी खिलाड़ियों पर ज़्यादा दारोमदार है और अगर मुख्य खिलाड़ी सही समय पर चलते हैं, तो उससे टीम का संतुलन अच्छा हो जाता है.
मोहिंदर अमरनाथ ने कहा कि अगर विकेटें धीमी हैं, तो ऑस्ट्रेलिया ही नहीं, बल्कि जिनके पास भी तेज़ गेंदबाज़ हैं, उन्हें मुश्किल आने वाली है. वेस्टइंडीज़ की पिचों पर बल्लेबाज़ी आसान हो सकती है.
उनका कहना है कि जिनके पास अच्छे ऑलराउंडर, अच्छे स्पिनर हैं, उनका पलड़ा भारी होगा. ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ़्रीका का ये पक्ष मज़बूत नहीं. हाँ, इंग्लैंड के पास ज़रूर अच्छा स्पिनर हैं.
यानी वेस्टइंडीज़ की पिचें ही ये फ़ैसला करेंगी कि कौन इस विश्व कप में मज़बूती से अपना दावा रखेगा.