मानक गुप्ता
बीबीसी संवाददाता, जमैका से
पाकिस्तानी टीम के खिलाड़ी राहत महसूस कर रहे हैं कि अब उन्हें दुनिया भर के मीडिया के सामने अंग्रेज़ी में नहीं बोलना पड़ेगा.
टीम ने फ़ैसला किया है कि विश्व कप के दौरान हर प्रेस कॉन्फ़्रेन्स में उनके खिलाड़ी अपनी राष्ट्रीय भाषा उर्दू में ही बोलेंगे.
वर्ल्ड कप और चैंपियन्स ट्रॉफ़ी जैसी बड़ी प्रतियोगिताओं में दुनिया के कोने कोने से पत्रकार आते हैं और अंग्रेज़ी ही एक ऐसी भाषा है जो उन सबको एक साथ सभी देशों के खिलाड़ियों और अधिकारियों से जोड़ पाती है.
लेकिन पाकिस्तानी कोच बॉब वूल्मर का कहना है कि अंग्रेज़ी में उनके खिलाड़ी खुल कर नहीं बोल पाते.
उन्होंने कहा,'' हमारे खिलाड़ी उर्दू में ख़ुद को बेहतर ढंग से समझा सकते हैं और ज़्यादा साफ़ तरीक़े से अपनी बात दुनिया के सामने रख सकते हैं.''
वूल्मर ने कहा कि पाकिस्तानी खिलाड़ियों को अपने देश और अपनी भाषा पर गर्व है इसलिए वो विश्व कप के दौरान भी उर्दू में ही बोलेंगे और विदेशी पत्रकारों के लिए टीम के मीडिया मेनेजर परवेज़ मीर अंग्रेज़ी में अनुवाद करेंगे.
1975 में हुए पहले वर्ल्ड कप में पाकिस्तान के लिए खेल चुके परवेज़ मीर भी कहते हैं कि खिलाड़ियों को अपनी भाषा चुनने का पूरा अधिकार होना चाहिए.
उन्होंने कहा,'' दुनिया भर में ऐसा होता है, खिलाड़ी उसी भाषा में बोलते हैं जिसमें वे ठीक महसूस करते हैं. फ़ुटबॉल में भी तो ऐसा होता है जहाँ खिलाड़ी फ़्रेंच, लातिनी और अलग अलग भाषाओं में बोलते हैं.''
ग़ौरतलब है कि पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने अपने खिलाड़ियों को अंग्रेज़ी सिखाने के लिए दो साल पहले एक कोर्स का आयोजन किया था लेकिन अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के व्यस्त कार्यक्रम की वजह से खिलाड़ी अंग्रेज़ी नहीं सीख पाए थे.