मंगलवार, 06 मार्च, 2007 को 17:08 GMT तक के समाचार
झूलन गोस्वामी
उप कप्तान, भारतीय महिला क्रिकेट टीम
जब बचपन में मैने क्रिकेट खेलना शुरु किया था तो माता-पिता को ये बिल्कुल पसंद नहीं था. मैं लड़कों के साथ क्रिकेट खेलती थी और माता-पिता को ये अच्छा नहीं लगता था कि मैं लड़कों के साथ जाकर क्रिकेट खेलूँ.
शुरूआती एक साल में बड़ी मुश्किल हुई. कोलकाता में जहाँ मैं रहती थी, वहाँ माहौल ही ऐसा था.कोई लड़की अगर लड़कों के साथ क्रिकेट खेले तो घर के लोग और आस-पड़ोस वालों को ऐतराज़ होता था.
लेकिन मुझे इन चीजों से कभी कोई फ़र्क नहीं पड़ा. फिर बाद में जब घरवालों ने भी देखा कि क्रिकेट में मेरी बेहद रुचि है तो, धीरे-धीरे वो मेरी च्वाइस से सहमत हो गए और मेरा उत्साह भी बढ़ाया.
आजकल हर क्षेत्र में महिलाएँ आगे आ रही हैं तो क्रिकेट में क्यों नहीं. जो लोग सोचते हैं कि लड़कियों के लिए क्रिकेट एक अच्छा करियर विकल्प नहीं है उन्हें अपनी मानसिकता बदलने की ज़रूरत है.
बेहतर सुविधाएँ मिलने लगी हैं
वैसे पिछले कुछ सालों में महिला क्रिकेट एसोसिएशन बहुत खराब दौर से गुज़री है. एसोसिएशन के पास ज़्यादा पैसा नहीं था और न कोई प्रायोजक. मीडिया भी महिला क्रिकेट के मैचों को ठीक से कवर नहीं करता था. अख़बारों में ढूँढना पड़ता है कि किस कोने में हमारी जीत की ख़बर छपी है. इसमें मीडिया का बड़ा हाथ है.
प्रायोजकों की कमी और मीडिया की उदासनीता के चलते महिला क्रिकेट कभी सुर्खियों में नहीं रहा.
वर्ष 2005 में महिला विश्व कप के फ़ाइनल मैच का कई देशों में सीधा प्रसारण हुआ लेकिन भारत में नहीं हुआ. इसलिए शायद आज भी बहुत से लोगों को नहीं पता होगा कि भारतीय महिला टीम विश्व कप के फ़ाइनल में पहुँची थी.
लेकिन पिछले कुछ समय से जब से महिला क्रिकेट एसोसिएशन बीसीसीआई के तहत आई है, चीज़ें बदल रही हैं.
स्कूलों में क्रिकेट खेला जाने लगा है- अंडर-12, अंडर-13 और अंडर-18 स्तर पर क्रिकेट होने लगा है. महिलाओं के लिए घरेलू क्रिकेट को काफ़ी बढ़ावा मिल रहा है.
वो सब सुविधाएँ जो पुरुष खिलाड़ियों की मिलती हैं, धीरे-धीरे हमें भी मिलने लगेंगी. जैसे पहले खिलाड़ी जब एक जगह से दूसरी जगह यात्रा करती थीं तो उनका ट्रेन में आरक्षण भी नहीं किया जाता था और डीए भी नहीं मिलता था.
लेकिन अब कई टीमें वातानुकूल श्रेणी में यात्रा करती हैं और कई हवाई जहाज़ में जाती हैं. मैदान पर भी बेहतर सुविधाएँ मिलने लगी हैं.
उम्मीद है कि बीसीसीआई के परिदृशय पर आने से महिला क्रिकेट की स्थिति बेहतर ही होगी.
(वंदना के साथ बातचीत पर आधारित)