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'लिंग परीक्षण में ग़लत पाई गईं शांति'

पिछले दिनों एशियाई खेलों में महिलाओं की श्रेणी में रजत पदक पाने वाली भारत की एक शीर्ष एथलीट के महिला होने पर ही सवाल खड़े कर दिए गए हैं.

अधिकारियों के मुताबिक एथलीट शांति सौदराराजन के परीक्षण के बाद पाया गया है कि वो महिला नहीं हैं.

इस बात के सामने आने के बाद इस बात की आशंका व्यक्त की जा रही है कि उन्हें अपना रजत पदक लौटाना पड़ सकता है.

शांति ने इसी महीने दोहा में हो रहे एशियाई खेलों में महिला वर्ग में 800 मीटर की दौड़ में रजत पदक जीता था.

इसी वर्ष राजधानी दिल्ली में एक राष्ट्रीय स्तर की चैंपियनशिप में उन्हें वर्ष का सर्वश्रेष्ठ एथलीट घोषित किया गया था.

शांति शायद तीसरी ऐसी खिलाड़ी हैं जिन्हें लिंग परीक्षण में ग़लत ठहराया गया है.

इस बारे में जानकारी देते हुए भारतीय ओलंपिक संघ के चिकित्सा आयोग के प्रमुख डॉक्टर मनमोहन सिंह ने बताया कि शांति का दोहा में लिंग परीक्षण किया गया था जिसके बाद जारी की गई रिपोर्ट में कहा गया है कि वो इस परीक्षण में फेल हो गईं.

हालांकि अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं के लिए इस तरह का परीक्षण अनिवार्य नहीं है पर यदि अधिकारी इसकी ज़रूरत समझते हैं या साथी खिलाड़ी इसपर आपत्ति करते हैं तो लिंग परीक्षण किया जाता है.

उनका यह परीक्षण नौ दिसंबर को प्रतियोगिता जीतने के बाद किया गया.

ग़ौरतलब है कि पिछले ही वर्ष दक्षिण कोरिया में खेलों के पूर्व उनका लिंग परीक्षण किया गया था जिसमें उन्हें सही पाया गया था. इस प्रतियोगिता में उन्होंने 800 मीटर दौड़ में रजत पदक जीता था.

अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि एशियाई खेलों में किए गए परीक्षण में वो क्यों ग़लत साबित हो गईं.