शनिवार, 16 दिसंबर, 2006 को 13:14 GMT तक के समाचार
मलय नीरव
दिल्ली से
भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) के पूर्व अध्यक्ष जगमोहन डालमिया को बीसीसीआई से तीन साल के लिए बर्ख़ास्त करने के फ़ैसले को राजसिंह डूंगरपुर ने सही कहा है.
उन्होंने कहा कि हालाँकि इससे भारतीय क्रिकेट की गरिमा को धक्का लगा है लेकिन कठोर फ़ैसला लेना ज़रूरी था.
बीसीसीआई के पूर्व अध्यक्ष डूंगरपुर ने बीबीसी हिंदी से कहा, ''बीसीसीआई ने काफ़ी दिनों तक डालमिया के तौर-तरीक़े को देखने के बाद यह क़दम उठाया है. उन्होंने बहुत कुछ उलटा-सीधा किया था.''
राजसिंह डूंगरपुर ने कहा, ''हम अच्छा खेल भी नहीं रहे हैं और ऐसे खेल प्रशासक के ख़िलाफ़ कार्रवाई न की जाती तो ग़लत संदेश जाता. इससे अब दूसरे खेल प्रशासकों को भी संदेश जाएगा कि अगर वे ग़लती करेंगे तो उनके ख़िलाफ़ भी कार्रवाई की जा सकती है.''
'बदला नहीं'
एक सवाल के जवाब में उन्होंन कहा, ''इस फ़ैसले के पीछे डालमिया से बदले की कार्रवाई जैसी कोई भावना नहीं थी. बोर्ड ने भारी बहुमत से उन्हें बर्ख़ास्त करने का फ़ैसला किया. केवल बंगाल क्रिकेट संघ और नेशनल क्रिकेट क्लब ने ही डालमिया के समर्थन में वोट दिया.''
राजिसंह ने बताया कि फ़िलहाल तो डालमिया को तीन साल के लिए बर्ख़ास्त किया गया है इसके बाद वो आवेदन कर सकते है तब बीसीसीआई आगे का फ़ैसला करेगा.
उधर जगमोहन डालमिया के समर्थक माने जाने वाले बीसीसीआई के पूर्व अध्यक्ष रणवीर सिंह महिंद्रा ने इस फ़ैसले को काफ़ी कठोर कहा. उनका कहना है कि सारे मुद्दे को बातचीत के ज़रिए सुलझाया जा सकता था.
यह पूछे जाने पर कि आपने भी तो डालिमया के ख़िलाफ़ वोट किया है इसके जवाब में रणवीर सिंह महिंद्रा ने कहा, ''बोर्ड में शरद पवार गुट का बहुमत है और लोगों ने उनकी हाँ में हाँ मिलाई. मैंने भी समझौता किया.''