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रविवार, 26 नवंबर, 2006 को 08:35 GMT तक के समाचार

केपटाउन में भी कहीं का नहीं रहा भारत

हाथ में आई हुई चीज़ कैसे गँवाई जाती है- ये कोई भारतीय क्रिकेट टीम से सीखे. दक्षिण अफ़्रीका के ख़िलाफ़ तीसरे एक दिवसीय मैच में एक समय भारत की स्थिति इतनी अच्छी थी कि जानकार टीम के जीतने तक के दावे करने लगे.

लेकिन फिर स्थितियाँ ऐसी बदलीं कि हार बचाने के लिए संघर्ष करना पड़ा और आख़िरकार संघर्ष बेकार हुआ और तीसरे एक दिवसीय मैच में भी टीम की नैया पार नहीं हो पाई.

भारत को जीत के लिए 275 रनों का लक्ष्य मिला था. लेकिन पूरी टीम 168 रन बनाकर आउट हो गई. कप्तान राहुल द्रविड़ और महेंद्र सिंह धोनी के अलावा कोई भी बल्लेबाज़ संघर्ष नहीं कर पाया.

द्रविड़ ने सर्वाधिक 63 रन बनाए और धोनी ने 55 रनों का योगदान दिया. जब दोनों बल्लेबाज़ी कर रहे थे तो ऐसा लग रहा था कि शायद भारतीय टीम मैच में वापसी कर सके.

लेकिन धमाकेदार पारी खेल रहे धोनी ने संयम नहीं दिखाया और छक्का लगाने की कोशिश में कैच दे बैठे. उनके आउट होने के बाद एक बार फिर विकेट गिरने का सिलसिला शुरू हुआ और पूरी टीम 168 रन बनाकर आउट हो गई.

शॉन पोलक ने पहले ही ओवर में वीरेंदर सहवाग को आउट कर शानदार शुरुआत की. सहवाग अपना खाता भी नहीं खोल पाए. उसके बाद बारी थी सचिन तेंदुलकर की. उन्होंने दो रन बनाए.

उसके बाद मोहम्मद कैफ़ 10, दिनेश कार्तिक 14, इरफ़ान पठान एक, हरभजन सिंह 10, अजित अगरकर छह, ज़हीर ख़ान दो और कुंबले बिना कोई रन बनाए आउट हो गए.

पोलक ने चार विकेट लिए. एंड्रयू हाल को तीन और याक कैलिस को दो विकेट मिले. एक विकेट एंटिनी को मिला.

दक्षिण अफ़्रीका की पारी

इससे पहले टॉस जीतकर दक्षिण अफ़्रीका ने पहले बल्लेबाज़ी करने का फ़ैसला किया. लेकिन उनकी शुरुआत काफ़ी ख़राब रही.

ज़हीर ख़ान ने पहली ही ओवर में ग्रैम स्मिथ और याक कैलिस को पवेलियन भेजकर भारत के लिए चमत्कारिक शुरुआत की.

उसके बाद भारतीय गेंदबाज़ी, फ़ील्डिंग- सब कुछ देखने लायक़ था. इसी के बलबूते एक समय दक्षिण अफ़्रीका ने अपने छह विकेट सिर्फ़ 76 रन पर गँवा दिए थे.

भारत का पलड़ा भारी था. भारतीय कैंप में उत्साह था. खिलाड़ी जी-जान लगा रहे थे. फिर एकाएक सब कुछ बिखरने लगा. कैच छूटने लगे, उत्साह काफ़ुर हो गया और रनों का अंबार लगने लगा.

पहले शॉन पॉलक ने जस्टिन केंप के साथ 60 अहम रन जोड़े और फिर उनके आउट होने के बाद केंप और एंड्रयू हॉल ने मिलकर भारतीय गेंदबाज़ों की दुर्दशा कर दी.

चौके, छक्के लग रहे थे, रन बन रहे थे और भारतीय गेंदबाज़ बिना किसी सबक के ख़राब गेंद डाल रहे थे. आठवें विकेट के लिए विश्व रिकॉर्ड बना.

जस्टिन केंप ने शतक जड़ा और एंड्रयू हॉल ने अर्धशतक और दक्षिण अफ़्रीका ने 50 ओवर में सात विकेट पर 274 रन का स्कोर खड़ा किया.

आठवें विकेट के लिए हॉल और केंप के बीच 138 रनों की नाबाद साझेदारी हुई. आठवें विकेट के लिए यह नया विश्व रिकॉर्ड है.

इससे पहले ये रिकॉर्ड ऑस्ट्रेलिया के शेन वॉर्न और पॉल रिफ़ेल के नाम था. उन्होंने वर्ष 1993-94 में पोर्ट एलिज़ाबेथ में दक्षिण अफ़्रीका के ख़िलाफ़ आठवें विकेट के लिए 119 रन जोड़े थे.