गुरुवार, 16 नवंबर, 2006 को 17:48 GMT तक के समाचार
वर्ष 2008 में बेजिंग में आयोजित होने वाले ओलंपिक खेलों में सफेद चूहे भी हिस्सा लेंगे लेकिन उनका हुनर कुछ अलग तरह का होगा. उनका काम होगा अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों को विषाक्त भोजन से बचाना.
बेजिंग शहर के स्वास्थ्य निरीक्षकों ने कहा कि इन चूहों को दूध, शराब, सलाद, चावल, तेल और मौसमी फल खिलाए जाएंगे.
उनका कहना था कि चूहों पर किसी भी पदार्थ का असर 17 घंटों में ही दिख जाता है जबकि प्रयोगशालाओं में हुए परीक्षणों के परिणाम मिलने में काफ़ी लंबा समय लगता है.
खाद्य पदार्थों के संरक्षण और साफ़-सफ़ाई की कमी और निम्न स्तर की वितरण प्रणाली की वजह से चीन में विषाक्त भोजन एक आम बात बन गया है.
यह क़दम चीन सरकार के उन विशेष प्रयासों का हिस्सा है जो खेलों के इस महाकुंभ को सुनियोजित ढ़ंग से आयोजित करने के लिए चलाए जा रहे.
24 घंटे निगरानी
चीन की सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के मुताबिक बेजिंग के स्वास्थ्य निरीक्षण ब्यूरो के अधिकारी ज़ाओ शिनशेंग ने कहा है कि ओलंपिक की रसोईयों में बनने वाला भोजन और खाद्य पदार्थों को खिलाड़ियों को दिए जाने से एक दिन पहले चूहों को खिलाया जाएगा.
इस तरह से विषाक्त भोजन को समय रहते पहचाना और नष्ट किया जा सकेगा.
खेलों के दौरान 10,000 से ज़्यादा खिलाड़ी खेलगांव में रहेंगे.
खेलों के दौरान रसोइयों में चौबीसों घंटे सुरक्षा अधिकारी मौजूद रहेंगे. खाद्य पदार्थ रखे जाने की जगह पर लगातार निगरानी रखी जाएगी और सभी वाहनों में आधुनिक यंत्र लगे होंगे.
बेजिंग ओलंपिक समिति के ज़ेन शियाओज़ेन ने कहा कि खेलों के दौरान पश्चिमी भोजन के साथ कुछ विशेष चीनी भोजन तैयार किया जाएगा.
बेजिंग से बीबीसी संवाददाता क्वेन्टिन सॉमरविले ने कहा कि ओलंपिक खेलों को एक सफल आयोजन बनाने में कोई क़सर नहीं छोड़ी जा रही है.