सोमवार, 23 अक्तूबर, 2006 को 00:38 GMT तक के समाचार
फ़ॉर्मूला वन सर्किट के शहंशाह कहे जाने वाले माइकल शूमाकर ने मोटर रेसिंग करियर को अलविदा कह दिया पर उनकी विदाई यादगार नहीं बन पायी.
उनकी इस आख़िरी रेस में भाग्य ने उनका साथ नहीं दिया और विश्व चैम्पियन के रूप में उनकी विदाई नहीं हो सकी.
करियर के आख़िरी पड़ाव पर ब्राज़ीलियन ग्राँ प्री मुकाबले के अंतिम क्वालिफाइंग दौर में शूमाकर की फेरारी जवाब दे गई थी और वे 10 वें स्थान पर खिसक गए.
हालांकि किसी स्टंट अभिनेता की तरह रविवार की रेस में टायर में ख़राबी आने के बावजूद उन्होंने कोशिश नहीं छोड़ी और अपने करियर की अंतिम रेस में वो चौथे स्थान पर रहे.
इस बार का खिताब रेनॉल्ट की टीम के फर्नांडो अलोंजों के नाम रहा.
जर्मनी के शूमाकर इससे पहले सात बार विश्व चैम्पियन रह चुके हैं और 16 साल के अपने करियर में उन्होंने 90 से ज़्यादा प्रतियोगिताएँ जीती हैं.
क्वालिफाइंग मुक़ाबलों की स्थिति के अनुसार निर्णायक रेस में शूमाकर नो 10वें स्थान से रेस की शुरुआत की जबकि अलोंजों ने चौथे स्थान से.
अलविदा
माइकल शूमाकर की गिनती फ़ॉर्मूला वन के सबसे महान और विवादास्पद खिलाड़ियों में की जाती है.
अपनी विदाई पर उन्होंने कहा, "मुझे अपने करियर के 16 वर्षों के दौरान के अच्छे और ख़राब लम्हों की याद आएगी. इसके अलावा अपने चाहने वालों का समर्थन भी याद आएगा जिसकी वजह से मुझमें आत्मविश्वास बना रहता था."
उन्होंने कहा, "मेरे इस लंबे करियर के दौरान इस समर्थन का ख़ास महत्व रहा है और मैं इसके लिए सभी का धन्यवाद करता हूँ."
37 वर्षीय शूमाकर ने प्रशंसकों को संबोधित करते हुए कहा, " मुझे मालूम है कि केवल धन्यवाद कहने भर से मैं उन्हें कुछ वापस नहीं कर पाऊँगा पर मुझे डर है और मैं इस वक्त इससे ज़्यादा कुछ कर भी नहीं सकता."
1994 में शूमाकर ने बेनेटन-फ़ोर्ड के साथ पहला विश्व खिताब जीता था.
उसके बाद 1995, 2000, 2001, 2002, 2003 और 2004 में भी शुमाकर ने इस खिताब पर क़ब्ज़ा किया था.
उन्हें हमेशा ऐसे खिलाड़ी के तौर पर याद रखा जाएगा जो कई बार नियमों के दायरे से बाहर गए और सफल भी रहे.