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नारायण बारेठ
बीबीसी संवाददाता,जयपुर

पाकिस्तान के लिए नहीं की दुआ...

पाकिस्तानी बल्लेबाज़ फ़ैसल इक़बाल ने अजमेर स्थित ख्वाज़ा मोइनुद्दीन हसन चिश्ती की दरगाह की ज़ियारत की और अपनी टीम की जीत के लिए दुआ की.

दिलचस्प बात ये रही कि दरगाह के खा़दिमों ने पाकिस्तान टीम के लिए दुआ मांगने से इनकार कर दिया और कहा 'हम सिर्फ़ भारत की फ़तह चाहते हैं.'

चैंपियंस ट्रॉफ़ी के लिए जयपुर में इकट्ठा हुई पाकिस्तान और बांग्लादेश की टीमों के अधिकांश खिलाड़ी अजमेर पहुँचकर अपनी टीम की जीत की दुआ करते रहे हैं.

इसी कड़ी में फ़ैसल इक़बाल भी ख्वाज़ा के दरबार में हाज़िरी लगाने आए थे. वहाँ उनके खादिम सैय्यद मुशीर चिश्ती और सैय्यद नातिक चिश्ती ने फ़ैसल को ज़ियारत करवाई.

वतनपरस्ती

जब फैसल ने खादिमों से पाकिस्तान की जीत के लिए दुआ करने को कहा तो खादिमों ने साफ़ कह दिया कि वे अपने मुल्क़ की जीत के लिए ही दुआ करेंगे.

सैय्यद मुशीर चिश्ती ने बीबीसी को बताया,"हमने उनसे कहा कि हम आपके और आपके परिवार की खुशहाली की दुआ करते हैं, लेकिन जब बात क्रिकेट मुकाबले की हो तो वतनपरस्ती पहले है. हम भारत की कामयाबी की दुआ करते हैं."

फ़ैसल इक़बाल ने कहा कि बचपन से ही ख़्वाहिश ग़रीब नवाज़ की चौखट चूमने की थी और वहाँ जाकर उनकी यह हसरत पूरी हो गई है. फैसल ने कहा कि उनकी मां ने खास तौर पर उन्हें अजमेर शरीफ़ में ज़ियारत के लिए कहा था.

फ़ैसल ने मज़ार-ए-शरीफ़ पर चादर चढ़ाई और अकीदत के फूल पेश किए.

चैंपियंस ट्रॉफ़ी में भारत और पाकिस्तान की टीमें अलग़-अलग़ ग्रुप में हैं और यदि दोनों टीमों का विजय अभियान जारी रहा तो सेमीफाइनल या फाइनल में परंपरागत प्रतिद्वंद्वी आमने-सामने हो सकते हैं.