रविवार, 15 अक्तूबर, 2006 को 11:04 GMT तक के समाचार
मानक गुप्ता
बीबीसी संवाददाता, दिल्ली से
पाकिस्तान क्रिकेट टीम के ऑलराउंडर शाहिद अफ़रीदी का ज़िक्र हो तो आतिशी बल्लेबाज़ी का नज़ारा ज़हन में घूमने लगता है.
लेकिन चैम्पियंस ट्रॉफ़ी में वे संभलकर खेलने की बात कर रहे हैं. उनका कहना है कि इंज़माम उल हक़ की ग़ैर-मौजूदगी में उनकी और दूसरे वरिष्ठ खिलाड़ियों की ज़िम्मेदारियाँ बढ़ गई हैं.
अफ़रीदी ने अपने खेल और आगे की रणनीति से जुड़े सवालों पर भी बीबीसी हिंदी के मानक गुप्ता से खुलकर बात की.
15 गेंदों पर 50 स्कोर करेंगे?
ज़िम्मेदारी इसको कहते हैं! 15 गेंद पर 50 रन बनाने की बात नहीं है. चाहे बल्लेबाज़ी हो या गेंदबाज़ी ऐसा कुछ करेंगे जिससे टीम को फ़ायदा हो. जितने भी बल्लेबाज़ हैं आप उनको देखिए तो पता चलेगा कि वक्त के साथ खेल-खेल कर उनकी बल्लेबाज़ी में परिपक्वता आई है.
आप इंज़ी भाई का मिसाल देखिए, उनकी बल्लेबाज़ी वक्त के साथ बेहतर से बेहतर होती गई. फिर जिस तरह की मैं, सहवाग या जयसूर्या बल्लेबाज़ी करते हूँ उसमें काफ़ी खतरा रहता है या तो आर या पार.
शाहिद, आपके बारे में कहा जा रहा है कि पाकिस्तान टीम के इंग्लैंड में टेस्ट सीरीज़ हारने से आप बहुत गुस्से में हैं और इस बार सबकी ऐसी-तैसी करने वाले हैं.
नहीं ऐसी कोई बात नहीं है. क्रिकेट में कोई कह कर किसी की ऐसी- तैसी नहीं कर सकता है. क्रिकेट में कभी भी बड़े बोल नहीं बोलने चाहिए. मैं बस यहाँ क्रिकेट का आनंद उठाने आया हूँ. दो साल पहले जब से मेरी वापसी हुई है मैं बस क्रिकेट का आनंद लेना चाहता हूँ.
आप किस नंबर पर बल्लेबाज़ी करना पसंद करते हैं?
ओपनिंग भी कर सकता हूँ, वैसे कप्तान बताएँगे कि मैं कहाँ बल्लेबाज़ी करूँगा क्योंकि मुझे आज तक अपने बैटिंग नंबर के बारे में पता नहीं चला.
तीसरे नंबर पर बल्लेबाज़ी कर लें, ओपन करा लें या नंबर छह पर बल्लेबाज़ी कर लें.
चैम्पियंस ट्रॉफ़ी बहुत बड़ा टूर्नामेंट है. मैं ये नहीं कह सकता कि पाकिस्तानी टीम यह टूर्नामेंट जीतेगी. जो टीम अच्छा खेलेगी वो जीतेगी. वन-डे क्रिकेट में आजकल बाँग्लादेश की टीम भी अच्छी है और हॉलैंड की टीम भी. इसलिए किसी एक टीम को दावेदार नहीं बता सकते. पाकिस्तान टीम अच्छा क्रिकेट खेलने की योजना के साथ यहाँ आई है.
भारत आकर खेलना कैस लगता है?
भारत आकर खेलना हमेशा अच्छा लगता है और मैं यहाँ क्रिकेट का आनंद उठाता हूँ. यहाँ दर्शकों का काफ़ी दबाव होता है जब हम छक्के-चौके लगाते हैं तो ताली नहीं बजती और भारतीय खिलाड़ियों के छक्के-चौकों पर खूब ताली बजती है लेकिन इसमें भी मज़ा आता है. हालाँकि ऐसा कहीं-कहीं ही होता है.
और भारतीय लोग ?
यहाँ के लोग बहुत ज़बर्दस्त हैं और उनके साथ मेरा अनुभव शानदार रहा है. मैं यहाँ चार-पाँच बार खेल चुका हूँ, काफ़ी मज़ा आया.
आपने टेस्ट क्रिकेट छोड़ने का ऐलान कर दिया था फिर बाद में मान गए, क्या अब टेस्ट क्रिकेट खेलेंगे?
मैं चाह रहा था कि वर्ल्ड कप तक सिर्फ़ वन-डे पर ध्यान दूँ क्योंकि आजकल क्रिकेट के दोनों संस्करणों में प्रदर्शन करना मुश्किल है. लेकिन चेयरमैन साहब और मेरे शुभचिंतकों ने मुझे कहा कि तुम्हें वापस आना चाहिए. उन लोगों ने कहा कि मैंने यह फ़ैसला जज़्बात में आकर किया है. खैर फ़ैसला किया तो था जज़्बात में ही आकर ही. बहरहाल अब टेस्ट खेलना पड़ेगा.
ते़ज़ गेंदबाज़ को खेलना पसंद करते हैं या स्पिनर को?
बल्ले पर जब गेंद आ रही होती है तो सारे गेंद अच्छे लगते हैं.