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बुधवार, 11 अक्तूबर, 2006 को 16:43 GMT तक के समाचार

मानक गुप्ता
बीबीसी संवाददाता, दिल्ली से

हमारी तैयारी बहुत अच्छी हैः अगरकर

भारत के तेज गेंदबाज़ अजीत अगरकर ने कहा है कि चैंपियंस ट्रॉफी के लिए टीम की तैयारी अच्छी है और इस ‘ख़ास टूर्नामेंट’ को जीतने की अधूरी इच्छा को पूरा करने की खिलाड़ी पूरी कोशिश करेंगे.

अगरकर ने कहा, “हम दो बार चैंपियंस ट्रॉफी के फाइनल में पहुँचे हैं. एक बार क्रिस केंस की शानदार पारी ने हमें खिताब से वंचित कर दिया और दूसरी बार हम अच्छी स्थिति में थे, लेकिन बारिश ने खलल डाल दिया.”

अजीत अगरकर से बातचीत

उन्होंने कहा कि टीम जिस भी टूर्नामेंट में खेलती है, उसे जीतने का लक्ष्य लेकर मैदान में उतरती है. चूँकि यहाँ दुनिया की सभी टीमें खेल रही हैं, ऐसे में यहाँ मिली जीत ‘ख़ास’ होगी.

टूर्नामेंट की तैयारियों के सवाल पर उन्होंने कहा, “हमारी तैयारी अच्छी है. हम दो दिन से दिल्ली में अभ्यास कर रहे हैं और अगले चार दिन जयपुर में होंगे. इसके अलावा हमारी मैच प्रेक्टिस भी काफ़ी है. हमने अभी चैलेंजर ट्रॉफी में हिस्सा लिया है और इससे पहले मलेशिया सिरीज़ में खेल चुके हैं.”

अगरकर ने माना कि मलेशिया में डीएलएफ कप में भारत का प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा. वो कहते हैं, “मलेशिया में टीम अच्छा नहीं खेली और हम इससे वाकिफ़ हैं. मैं नहीं समझता कि लोगों को हमें यह बताने जरूरत है. कोशिश ये रहेगी कि अभ्यास के दौरान कमज़ोरियों को सुधारा जाए और ग़लतियों को न दोहराया जाए.”

नए प्रयास

उन्होंने कहा कि चैंपियंस ट्रॉफी में टीम की कोशिश वेस्टइंडीज और मलेशिया की विफलताओं को धोने की होगी. वे कहते हैं, “हर टूर्नामेंट में प्रयास तो यही रहता है. हम इसी दिशा में प्रैक्टिस कर रहे हैं और उम्मीद है कि सब कुछ ठीक रहेगा.”

यह पूछे जाने पर कि टीम के मुख्य गेंदबाज होने के नाते उनकी कोशिश रन रोकने की होगी या विकेट लेने की, अगरकर ने कहा, “यह पूरी तरह परिस्थितियों पर निर्भर करेगा. चूंकि विकेट बल्लेबाज़ों के माफिक हैं, इसलिए बल्लेबाज तो रन बनाएँगे ही. वनडे क्रिकेट में रन रोकना तो ज़रूरी होता ही है, लेकिन कभी-कभी जबरदस्त फ़ॉर्म में चल रहे बल्लेबाज़ का विकेट लेना प्राथमिकता होती है.”

घरेलू परिस्थितियों में भारतीय गेंदबाज़ी क्षमता के सवाल पर उन्होंने माना कि घरेलू विकेटों से वाकिफ़ होने का लाभ गेंदबाजों को मिलेगा, लेकिन साथ ही कहा, “ उपमहाद्वीप के सपाट और धीमे पिचों पर गेंदबाज़ी करना मुश्किल होता है. पहली ही गेंद से बल्लेबाजों पर अंकुश लगाना जरूरी है. आप बल्लेबाज़ को ज़रा सी भी ढी़ल नहीं दे सकते.”

दूसरे छोर से मुनाफ़ पटेल और इरफान पठान से सहयोग मिलने के सवाल पर उन्होंने कहा, “मलेशिया में हमने एक टीम के रूप में अच्छी गेंदबाजी की. मैं समझता हूँ कि हमने कुल मिलाकर अच्छा प्रदर्शन किया.”