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बुधवार, 11 अक्तूबर, 2006 को 16:59 GMT तक के समाचार

'इंज़ी की तारीफ़ सूरज को दिया दिखाना'

पाकिस्तानी क्रिकेटर यूनिस खान की कप्तानी को लेकर उठे विवादों के बाद पाकिस्तानी टीम पहली बार चैंपियंस ट्रॉफी में खेलने भारत आई है.

पिछले दिनों के उथल-पुथल और इस टू्र्नामेंट में अपनी टीम की दावेदारी को लेकर पाकिस्तानी कप्तान यूनिस ख़ान के साथ बीबीसी संवाददाता मानक गुप्ता की बातचीत.

यूनिस ख़ान से बातचीत

इंज़माम के बारे में क्या कहेंगे? टीम में उनकी कमी किस तरह खलेगी?

सबसे पहले तो एक कैप्टन के तौर पर हमें उनकी कमी खलेगी क्योंकि पिछले दो साल से जिस योजना के साथ वे चल रहे थे हम उसी के अनुरूप खेलने के अभ्यस्त हैं. इंज़माम ने हमेशा भारत में बड़ा नाम कमाया है और जिस तरह के वे बल्लेबाज़ हैं उसकी तारीफ़ करना सूरज को दीया दिखाने जैसा है. तो मेरा ख़याल है कि हम ज़रूर ही उनको मिस करेंगे.

इस टूर्नामेंट में अपने टीम की क्या संभावनाएँ देख रहे हैं आप?

मेरी टीम जैसी भी हो, मैं बड़े पोजिटिव नज़रिए के साथ आया हूँ. मेरी कोशिश हमेशा यही रहेगी कि मैं उनको अच्छा नेतृत्व दूँ. मैच की आखिरी गेंद तक उनको लड़ाऊँ. वनडे मैचों में खेल शुरु होने से पहले सभी टीमों की हार-जीत के हमेशा आधे-आधे चांस होते हैं. मैं तो यही मानकर चल रहा हूँ कि हमारे जीतने की बड़ी अच्छी संभावना है और हमें सेमीफाइनल तक जरूर ही पहुँचना चाहिए.

यहाँ भारत में आकर खेलना कैसा लगता है?

भारत से जुड़ी हुई कोई याद?

बड़ी अच्छी और जबरदस्त यादें हैं. मैं उस टीम का हिस्सा था जब हमने यहाँ टेस्ट सीरीज़ ड्रॉ की थी और वनडे चार-दो से हम जीते थे. वह अभी भी मेरे जेहन में है क्योंकि उसके बाद ही हमारे टीम का काफी नाम हुआ था. मजा आएगा कि यदि भारत और पाकिस्तान यहाँ फाइनल में खेलें और अच्छा मुकाबला हो.

पिछले दिनों जो कुछ हुआ उसके बारे में क्या कहेंगे?

पिछली सारी बातें मैंने भुला दी हैं (हँसते हुए).

आप इन विवादों को एक ही बार में शांत क्यों नहीं कर देते?

देखिए जो कुछ भी हुआ उसके शांत होने का अंदाज़ा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि मैं वापस कैप्टन बन गया हूँ (हँसते हुए). मेरा तो किसी से कोई मतभेद नहीं है और न होगा. मैं तो बस हमेशा क्रिकेट खेलता हूँ और एन्ज्वाय करता हूँ. अब भी मैं कोशिश यही कर रहा हूँ कि ये हमारे लिए बड़ा अच्छा मौका है हमारी टीम के लिए कि हम फिर से नाम कमाएँ और मेरे लिए भी कि एक कैप्टन की तौर पर भी मैं फिर से नाम कमाऊँ. पहले भी मैं एक-दो साल कप्तानी कर चुका हूँ. क्रिकेट में ये सब थोड़ा बहुत होता रहता है और मेरे ख़याल से हम सब को पिछली बातें भूल जानी चाहिए. अब हमारा ध्यान चैंपियंस ट्रॉफी और वर्ल्ड कप पर है.

कहा जा रहा था कि दो-तीन खिलाड़ियों का समर्थन आपको नहीं मिल पा रहा है?

नहीं, ऐसी कोई बात नहीं है और टीम पाकिस्तान पूरी तरह से एक है.