रविवार, 17 सितंबर, 2006 को 10:27 GMT तक के समाचार
जर्मनी में चल रहे हॉकी विश्व कप में भारत का प्रदर्शन काफ़ी निराशाजनक रहा.
हालांकि रविवार को भारत ने दक्षिण अफ्रीका की टीम को हराकर कम से कम आखिरी स्थान पर पहुँचने से ख़ुद को बचा लिया है.
इससे पहले 2002 में भारत ने कुआलालंपुर में 10वाँ स्थान पाया था.
हॉकी प्रेमियों को अपेक्षा थी कि भारत इस बार कुछ बेहतर प्रदर्शन करेगा और विश्व वरीयता क्रम में अपनी स्थिति में कुछ सुधार ज़रूर लाएगा लेकिन ऐसा नहीं हुआ.
भारत एक के बाद एक सारे मैच हारता रहा. दक्षिण अफ्रीका के साथ ही खेला गया पिछला एक मैच 1-1 की बराबरी पर ख़त्म हुआ था इसके अलावा जीत के नाम पर भारत के पास कुछ भी नहीं था.
संतोष करने के लिए बस इतना भर ही है कि रविवार को हुए मैच में भारत ने दक्षिण अफ़्रीका को हरा दिया और इस तरह भारत आखिरी स्थान पर पहुँचने से बच गया.
सबसे शर्मनाक स्थिति थी वर्ष 1986 में, जब लंदन में खेले गए विश्वकप हॉकी में भारत आखिरी स्थान पर था.
भारतीय हॉकी टीम के पूर्व कप्तान मोहम्मद शाहिद इस बारे में कहते हैं, "भारतीय खिलाड़ियों का प्रदर्शन काफ़ी निराश करने वाला और चिंताजनक रहा. भारत को दक्षिण अफ्रीका जैसी टीमों ने भी कड़ी चुनौती दी और उनके साथ पिछला मैच बराबरी पर ख़त्म हुआ."
हार पर हार
भारतीय टीम अपने पहले मैच में ही पिछले विश्वकप के विजेता जर्मनी से 2-3 से हार गई थी.
उसके बाद तो हार का सिलसिला ऐसा चला कि वह एक के बाद अपने पूल की टीमों से हारती चली गई. इंग्लैंड, दक्षिण कोरिया के हाथों भी उसे हार का मुंह देखना पड़ा.
नीदरलैंड के साथ भारतीय टीम का खेल भी निराश करने वाला रहा और यह मैच भारत 1-6 से हार गया.
ग़ौरतलब है कि हॉकी विश्व कप छह सितंबर से जर्मनी के मॉरसनग्लैडबाख़ में खेला जा रहा है.