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गुरुवार, 20 जुलाई, 2006 को 16:30 GMT तक के समाचार

ज़िदान पर पाबंदी और जुर्माना

विश्व कप फुटबॉल के फाइनल में इटली के खिलाड़ी मार्को मैतरात्सी को सिर से धक्का मारने के आरोप में ज़िनेदिन ज़िदान पर तीन मैचों के लिए पांबदी लगा दी है और उन पर तीन हज़ार 260 ब्रिटिश पाउंड का जुर्माना भी किया गया है.

विश्व फुटबॉल संघ फीफा की जाँच के बाद मैतरात्सी को भी ज़िदान को भड़काने के आरोप में दो मैचों के लिए निलंबित किया गया था और उन पर भी दो हज़ार 170 ब्रिटिश पाउंड का जुर्माना किया गया था.

फीफा के एक वक्तव्य में कहा गया है, "दोनों खिलाड़ियों ने यह ज़ोर देकर कहा था कि मैतरात्सी की टिप्पणी अपमानजनक थी लेकिन वह नस्लवादी प्रकृति की नहीं थी."

ज़िदान पर लगी पाबंदी सांकेतिक महत्व की है क्योंकि वह विश्व कप फुटबॉल का फाइनल खेलने के बाद रिटायर हो गए हैं.

अल बत्ता 34 वर्षीय ज़िदान अब भी फीफा के साथ तीन साल के लिए काम करते रहेंगे.

फीफा ने कहा है, "ज़िनेदिन ज़िदान बच्चों और युवाओं के साथ सामाजिक कार्य करने के लिए राज़ी हुए हैं."

मामले की सुनवाई के दौरान दोनों खिलाड़ियों ने अपने अनुचित व्यवहार के लिए फीफा से माफ़ी मांगी और घटना पर अफ़सोस जताया.

गुरूवार को ज़िनेदिन ज़िदान की सुनवाई डेढ़ घंटे तक चली जबकि फीफा पैनल ने मैतरात्सी की सुनवाई 14 जुलाई को की थी.

ग़ौरतलब है कि विश्व कप फुटबॉल 2006 का फाइनल ज़िनेदिन ज़िदान के करियर का आख़िरी मैच था जिसके बाद उन्होंने सक्रिय खेल को अलविदा कह दिया है.

मैतरात्सी पर पाबंदी का मतलब होगा कि वह यूरो 2008 प्रतियोगिता के शुरूआती दो मैचों में इटली की तरफ़ से नहीं खेल सकेंगे.

उस मैच में अतिरिक्त समय के खेल के दौरान ज़िनेदिन ज़िदान ने मैतरात्सी को सिर से धक्का मार दिया था. बाद ने ज़िदान ने दावा किया था कि मैतरात्सी ने उनकी माँ और बहन का अपमान किया था.

लेकिन मैतरात्सी ने कहा था कि उनकी टिप्पणी न तो नस्लवादी थी, न धार्मिक ऑऔर न ही राजनीतिक. मैतरात्सी ने कहा, "न ही मैंने उनकी माँ के बारे में कुछ कहा."

इस घटना के बावजूद ज़िदान प्रतियोगिता के बेहतरीन खिलाड़ी के तौर पर गोल्डन बॉल हासिल करने गए और फीफा ने यह भी पुष्टि कर दी कि ज़िदान वो पुरस्कार अपने पास रख सकेंगे, हालाँकि इसके विपरीत ख़बरें आई थीं.

फीफा के प्रवक्ता एंड्रीज़ हैरेन ने कहा कि इस बारे में बैठक में कोई चर्चा नहीं हुई.