शनिवार, 08 जुलाई, 2006 को 16:39 GMT तक के समाचार
फ्रांस की एमिली मोरेज़्मो ने ग़ज़ब का साहस दिखाते हुए महिलाओं का विंबलडन टेनिस ख़िताब जीत लिया है.
मोरेज़्मो ने यह ख़िताब पहली बार जीता है. फाइनल में शनिवार को उन्होंने जस्टिन हेना हार्डिन जैसी धुरंधर खिलाड़ी को 2-6, 6-3 और 6-4 से हार का स्वाद चखा दिया.
मोरेज़्मो ने गत जनवरी में ऑस्ट्रेलियाई ओपन टेनिस ख़िताब जीता था और उस मैच में भी उनका मुक़ाबला जस्टिन हेना हार्डिन से हुआ था मगर वह चोट लगने की वजह से मैच का फ़ैसला होने से पहले ही रिटायर हो गई थीं.
लेकिन शनिवार को विंबलडन के फाइनल में मोरेज़्मो की जीत की संभावनाओं पर कोई शक नहीं किया गया. मोरेज़्मो की शुरूआत अच्छी नहीं रही और 31 मिनट में ही वो पहला सेट हार गईं.
उसके बाद हेना हार्डिन ने ग़लतियाँ करनी शुरू कर दीं. जब मैच तीसरे सेट तक पहुँचा तो उस पर सबकी नज़रें टिक गईं और सांसें थम गईं क्योंकि उस पर ही हार-जीत का फ़ैसला होना था.
जीत के साथ ही मोरेज़्मो अपने घुटनों पर गिर पड़ीं और उनकी आँखों से आँसू बहने लगे. उन्हें अपनी जीत पर भरोसा करने में कुछ लम्हे ज़रूर लगे.
कोर्ट पर ही बीबीसी के साथ इंटरव्यू में मोरेज़्मो ने कहा, "मैं यह जीत हासिल करने के लिए बड़ी बेताब थी और मैं नहीं चाहती कि अब कोई मेरे खेल की शैली पर फ़ब्तियाँ कसे."
उन्होंने कहा, "विंबलडन ट्रॉफ़ी टेनिस की दुनिया में बहुत ख़ास है और इसे हासिल करके सचमुच बहुत अच्छा लग रहा है."
24 वर्षीय जस्टिन हेना हार्डिन फ़ाइनल में जीत हासिल करके ऐसी 10वीं महिला खिलाड़ी का ख़िताब हासिल करना चाहती थीं जिन्होंने चारों ग्रैंड स्लैम ख़िताब जीते हों.
हारने के बाद जस्टिन ने भी मोरेज़्मो के खेल की तारीफ़ करते हुए कहा, "अब कहने के लिए कुछ बाक़ी नहीं बचा है. वह आज मुझसे बेहतर साबित हुई हैं और उन्होंने अवसर का सही इस्तेमाल किया है."