शुक्रवार, 23 जून, 2006 को 12:44 GMT तक के समाचार
दिव्या वशिष्ठ
भारतीय क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर एक लंबे अरसे से अपनी चोटों के कारण खेल नहीं पा रहे थे पर सोचिए सचिन फिर से बल्ला उठा लें तो पिच पर क्या रंग होगा.
अगर यह जानना है तो ज़रा केंब्रिज विश्वविद्यालय के फ़ैनर मैदान पर सचिन के बल्ले की चमक से चुंधियाए दर्शकों से पूछिए.
जी हाँ, दुनियाभर के गेंदबाज़ों को सपनों में भी डरा देने वाले सचिन पिछले दिनों केंब्रिज विश्वविद्यालय में लैशिंग क्लब के लिए हुए एक मैच में खेले और अपनी धुँआधार बल्लेबाज़ी का सिक्का जमाया.
पर रंग केवल सचिन की बल्लेबाज़ी का ही नहीं, पोशाक का भी बदला हुआ था.
भारतीय टीम के नीले रंगों को छोड़ लैशिंग क्लब की काले-सुनहरे रंग वाली युनिफॉर्म में सचिन वेस्टइंडीज़ के पूर्व खिलाड़ी रिची रिचर्डसन के साथ जब हरे-भरे फ़ैनर मैदान पर उतरे तो मैदान तालियों की गड़गड़ाहट से गूँज उठा.
फिर घूमा बल्ला
खेल की शुरुआत कुछ धीमी रही लेकिन जल्द ही सचिन पूरे फ़ार्म में नज़र आए.
15वें ओवर से पहले ही रिचर्डसन आउट हो गए लेकिन जाते-जाते भी सचिन की प्रशंसा करना नहीं भूले.
उन्होंने कहा, "सचिन के साथ खेल कर लगा कि वो अब अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में लौटने के लिए तैयार हैं. भले ही कुछ लोग यह कहें कि यह मैच एक यूनिवर्सिटी टीम के साथ था लेकिन मैं यही कहूँगा कि अगर हमारे पास अनुभव है तो इन युवा खिलाड़ियों के पास जोश है."
केंब्रिज के अलावा लंदन और आसपास की कई जगह से सचिन के दीवाने इस मैच को देखने के लिए पहुँचे.
जयपुर के लक्ष्मण सिंह तो तबीयत ख़राब होने का बहाना बनाकर आधे दिन की छुट्टी लेकर मैच देखने पहुँचे.
वो कहते हैं, "मैंने कभी सोचा भी नहीं था कि सचिन को इतने क़रीब से देखने का मौका मिलेगा. कुछ वर्ष पहले जब वो जयपुर में मैच खेलने आए थे तो दूरबीन के साथ भी उन्हें में ठीक से नहीं देख पाया था और आज तो वो इतने क़रीब खेल रहे थे कि मुझे अपनी आँखों पर यकीन नहीं हुआ."
जब 91 गेंदों पर सचिन ने शतक जमाया तो मैदान सचिन-सचिन-सचिन के नारों से गूंज उठा.
शायद ही ऐसा कोई मैच रहा हो जिसमें घर की टीम से ज़्यादा मेहमान टीम की जीत पर तालियाँ पिटी हों.
झूम उठे दीवाने
सचिन के 119 गेंदों पर शानदार 155 रनों की पारी के बाद वहाँ मौजूद उदयन, भाविनी और मानस जैसे कई भारतीय और ब्रितानी मूल के क्रिकेट प्रेमियों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा और वो मैदान में नाचते नज़र आए.
लैशिंग का यह मैच सचिन ने चैरिटी के लिए खेला, लैशिंग के चेयरमैन डेविड फ़ोब ने कहा, "सचिन ये मैच खेलने के लिए ख़ुद आगे आए. उनके इस फैसले से हमारे इस मैच के लिए बड़े पैमाने पर लोग पहुँचे. हैरानी की बात यह है कि सिर्फ़ एशियाई समुदाय ही नहीं बल्कि हमारे स्थानीय लोगों की नज़र में भी सचिन एक बड़े सितारे हैं."
कंधे की चोट के बावजूद 25 चौके और तीन छक्के लगाना कोई मामूली बात नहीं.
उनकी टीम में खेल रहे राशिद लतीफ़ का मानना था, "जब एक अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी चोट से उबर रहा हो तो इस तरह के मैच खेलना काफ़ी मदद करता है क्योंकि ड्रैसिंग रुम में हम सभी उनका हौसला बढ़ाते हैं जो कि आत्मविश्वास बढ़ाने में मदद करता है."
इस मैच में सचिन ने दर्शकों, आयोजकों और सह-खिलाड़ियों को तो ख़ूब खुश किया लेकिन मीडिया लाख कोशिशों के बाद भी उनसे कुछ नहीं पूछ पाया.
उम्मीद है कि अगले दो हफ्तों में होने वाले लैशिंग के पाँच मैचों में शायद वो अपने इरादों की कुछ भनक हमें भी दें.