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रविवार, 18 जून, 2006 को 14:22 GMT तक के समाचार

नागेंद्र शर्मा
बीबीसी संवाददाता

'खेल पाठ्यक्रम का अनिवार्य हिस्सा हो'

भारत के खेल मंत्रालय ने प्रस्ताव रखा है कि अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में देश के प्रदर्शन को बेहतर बनाने के लिए खेल को हाई स्कूल पाठ्यक्रम का अनिवार्य हिस्सा बनाया जाए.

ये जानकारी भारत सरकार के खेल और युवा मामलों के सचिव एसवाई क़ुरैशी ने बीबीसी हिंदी के विशेष कार्यक्रम 'आपकी बात बीबीसी के साथ' में श्रोताओं के सवालों के जवाब देते हुए दी.

उनका कहना था, "हमने मानव संसाधन मंत्रालय को पाठ्यक्रम में बदलाव करने के लिए सुझाव भेजा है. खेल पाँचवाँ अनिवार्य विषय होना चाहिए और राष्ट्रीय स्तर पर नवीं कक्षा से शुरू होना चाहिए."

क़ुरैशी का मानना है, "यदि खेल के विषय की परीक्षा भी अंकों के आधार पर हो तो इससे हाई स्कूल के लाखों बच्चों में खेल के प्रति दिलचस्पी पैदा होगी. इस समय माता-पिता बच्चों को खेल से पीछे इसलिए हटा लेते हैं क्योंकि यदि खेल में योग्यता का आकलन अंकों के आधार पर होता ही नहीं. इश कारण वे कहते हैं कि पाँच-छह घंटे किस लिए व्यर्थ किए जाएँ."

क्रिकेट बोर्ड की पेशकश

सरकार के केवल क्रिकेट के विकास प्रति ही गंभीर हैं होने के मुद्दे पर उनका कहना था, "इस आलोचना के बावजूद मैं बताना चाहता हूँ कि भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के अध्यक्ष शरद पवार ने अगले दस साल में 300 से 400 करोड़ रुपए अन्य खेलों के लिए उपलब्ध कराने की पेशकश की है."

उन्होंने बताया कि प्रस्ताव ये है कि देश में खेल-कूद के कम से कम 15 केंद्र खोले जाएँ जो केवल 10 से 14 वर्ष के बच्चों के लिए हों.

एक सवाल के जवाब में उन्होंने ये भी बताया कि खेल मंत्रालय ने एक योजना तैयार की है जिसके तहत ढ़ाई लाख पंचायतें खेल के मैदान तैयार करवाएँगी और पंचायत स्तर पर खेल की प्रतियोगिताएँ आयोजित की जाएँगी.

उनका कहना था कि सरकार की ओर से इस योजना को मंज़ूरी मिलनी बाक़ी है. लेकिन क़ुरैशी ने इस आलोचना को ख़ारिज किया कि राजनीतिक दख़ल के कारण देश में खेल-कूद की गतिविधियों में रुवाकट आ रही है.

उनका कहना था कि खेल मंत्रालय वर्ष 2010 के राष्ट्रमंडल खेलों को सफल बनाने के प्रति बहुत गंभीर है.