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शनिवार, 03 जून, 2006 को 09:21 GMT तक के समाचार

विश्व कप फ़ुटबॉल और भारत

ये बात अजीब ज़रूर लगेगी, लेकिन है कटु सत्य. दुनिया की सबसे ज़्यादा आबादी वाले देशों में दूसरे नंबर पर है भारत. लेकिन विश्व कप में भारत की भागीदारी न के बराबर है.

एशियाई फ़ुटबॉल में भी टीम का प्रदर्शन ऐसा नहीं रहा कि उसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कोई नाम मिल सके.

हालाँकि पिछले कुछ वर्षों के मुक़ाबले टीम ने कुछ बेहतर प्रदर्शन ज़रूर किया है लेकिन इतना नहीं कि उसे विश्व कप में जगह मिल सके. भारत ने विश्व कप के लिए कभी भी क्वालीफ़ाई नहीं किया.

दूसरे विश्व युद्ध के बाद जब विश्व कप दोबारा शुरू हुआ और 1950 में ब्राज़ील को मेजबानी मिली, तो भारत को भी विश्व कप में खेलने का न्यौता मिला.

क्योंकि कई प्रतिष्ठित टीमों ने विश्व कप से अपना नाम वापस ले लिया था. भारत को न्यौता तो ज़रूर मिला. टीम को मैच नहीं खेलने दिया गया क्योंकि भारत के सभी खिलाड़ी नंगे पाँव खेलते थे.

आवेदन

1954 में भारत ने फ़ीफ़ी के पास क्वालीफ़ाइंग राउंड खेलने के लिए आवेदन भेजा था, लेकिन उसका आवेदन अस्वीकार कर दिया गया.

1986 के विश्व कप के लिए भारत को क्वालीफ़ाइंग राउंड खेलने का मौक़ा मिला. लेकिन पहले दौर से आगे टीम नहीं पहुँच पाई.

1994 के बाद तो टीम ने लगातार क्वालीफ़ाइंग राउंड में हिस्सा लिया लेकिन पहले दौर से आगे नहीं बढ़ पाई.

वर्ष 2004 में दक्षिण कोरिया ने भारत को एशिया कप क्वालीफ़ाइंग राउंड में ही हराकर बाहर कर दिया.

इसके पहले सैफ़ खेलों में बांग्लादेश ने भारत को हराया था. इसके साथ ही लगातार दूसरे साल भारत के सैफ़ कप का ख़िताब जीतने के मंसूबे पर पानी फिर गया.

हालाँकि पिछले विश्व कप के क्वालीफ़ाइंग राउंड में भारत ने संयुक्त अरब अमीरात को 1-0 से हराकर ज़रूर अच्छा प्रदर्शन किया था. लेकिन आख़िरकार टीम का ये प्रदर्शन उसके काम नहीं आया.

2006 के विश्व कप के क्वालीफ़ाइंग राउंड में तो टीम का प्रदर्शन काफ़ी ख़राब रहा था. इस राउंड में भारत को छह ग्रुप मैचों में सिर्फ़ चार अंक मिले थे. आख़िरकार भारत को ग्रुप मैचों में तीसरा स्थान मिला.