शुक्रवार, 24 मार्च, 2006 को 07:14 GMT तक के समाचार
राष्ट्रमंडल खेल संघ ने इस बात की पुष्टि की है कि दो भारतीय वेटलिफ्टर प्रतिबंधित प्रतिबंधित दवाओं के सेवन के परीक्षण में पॉजिटिव पाए गए हैं.
दोनों भारोत्तोलकों पर प्रतिबंधित दवा स्टानोज़ोलोल के सेवन का आरोप है.
जब तक उनकी अपील की सुनवाई नहीं हो जाती तब तक राष्ट्रमंडल खेल संघ ने उनके नाम उजागर करने से इनकार किया है.
राष्ट्रमंडल खेल संघ के अध्यक्ष माइक फेनेल ने कहा,'' मैं इस बात की पुष्टि करता हूँ दो परीक्षणों में प्रतिबंधित दवाओं के सेवन की पुष्टि हुई है.''
फेनेल ने कहा,''एक एथलीट ने प्रतिस्पर्धा में हिस्सा लिया और दूसरे ने प्रतिस्पर्धा शुरू होने से पहले ही अपना नाम वापस ले लिया.''
भारतीय टीम को इसकी जानकारी रविवार को दे दी गई थी और इसके बाद एथलीट ने दूसरे नमूने लेने का अनुरोध किया था. लेकिन दूसरे नमूनों के नतीजे भी सकारात्मक आए.
भारतीय दल के महाप्रबंधक गुरबीर सिंह ने कहा,'' हमें इससे धक्का लगा है. जब भारत अच्छा प्रदर्शन कर रहा है, उस समय हम ऐसी किसी बात की उम्मीद नहीं कर रहे थे.''
अंतरराष्ट्रीय भारोत्तोलन संघ के नियमों के अनुसार एक साल में जिस देश के तीन खिलाड़ियों के मादक दवाओं के सेवन के मामलों की पुष्टि होती है, उसे अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धाओं में हिस्सा लेने से प्रतिबंधित कर दिया जाता है.
वर्ष 2004 के ओलंपिक खेलों में दो भारतीय वेटलिफ्टर प्रतिमा कुमारी और सनमाचा चानू मादक दवाओं के परीक्षणों में विफल रहीं थीं.
इसके बाद भारत पर अंतरराष्ट्रीय भारोत्तोलन प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने में प्रतिबंध लगा दिया गया था.
2002 के मैनचेस्टर खेलों में भी भारतीय भारोत्तोलक सतीश राय मादक दवाओं के परीक्षण को पास नहीं कर पाए थे. इसके बाद उनका स्वर्ण पदक वापस ले लिया गया था.
उसके बाद पहली बार सतीश राय किसी बड़ी प्रतियोगिता में पहली बार हिस्सा ले रहे हैं. लेकिन अभी तक वो कोई पदक नहीं जीत पाए हैं.