गुरुवार, 23 मार्च, 2006 को 23:20 GMT तक के समाचार
इंग्लैंड के हाथों मुंबई टेस्ट में भारत की करारी हार के बाद पूर्व भारतीय कप्तान सुनील गावस्कर ने भी भारतीय क्रिकेटरों और व्यवस्था की आलोचना की है.
मुंबई टेस्ट में भारत की दूसरी पारी केवल 100 रन पर ढेर हो गई थी जिसके कारण उसे 212 रन से हार का मुँह देखना पड़ा.
भारत के आख़िरी सात विकेट केवल 25 रन पर बिखर गए थे.
गावस्कर ने भारत के समाचारपत्र हिंदुस्तान टाइम्स में लिखा है,"बहुत अधिक एक दिवसीय मैचों और बल्लेबाज़ी क्रम में ज़रूरत से अधिक फेरबदल के कारण टीम के आत्मविश्वास पर विपरीत असर पड़ा है".
उन्होंने लिखा,"बात केवल हारने की नहीं है बल्कि जिस तरह से टीम बिना संघर्ष किए हार गई उसकी समीक्षा होनी चाहिए".
पूर्व टेस्ट क्रिकेटर कृष्णामाचारी श्रीकांत ने भी टीम की कड़ी आलोचना की है.
उन्होंने समाचारपत्र एशियन एज में लिखा है,"इस तरह से समर्पण करना एक कलंक के समान है".
श्रीकांत के शब्दों में,"भारत ने दयनीय बल्लेबाज़ी की और शीर्षपंक्ति के बल्लेबाज़ों ने ज़रा भी नहीं दिखाया कि वे वाकई जूझ रहे हैं".
श्रीकांत ने कहा है कि भारतीय टीम की तरफ़ से मैच को ड्रॉ करवाने के लिए संघर्ष करने की इच्छा नहीं दिखाना इस बात को दिखाता है कि टेस्ट क्रिकेट मे भारत को दूसरे नंबर पर अपनी जगह बनाने के लिए अभी लंबा रास्ता तय करना होगा.
भारत के तक़रीबन सभी समाचारपत्रों ने इंग्लैंड की टीम की सराहना की है और विशेष रूप से कप्तान एंड्र्यू फ़्लिंटॉफ़ को सराहा है जिन्हें माइकल वॉन और मार्कस ट्रेस्कोथिक की अनुपस्थिति में अचानक कप्तानी का भार उठाना पड़ा.