सोमवार, 20 फ़रवरी, 2006 को 15:55 GMT तक के समाचार
पाकिस्तान के ख़िलाफ़ वनडे सिरीज़ में शानदार जीत हासिल करने के बाद भारतीय टीम के कप्तान राहुल द्रविड़ मीडिया में खूब सुर्ख़ियाँ बटोर रहे हैं.
क्रिकेट के मैदान पर राहुल को मिस्टर भरोसेमंद और 'द वॉल' जैसे नाम से तो लोग जानते ही हैं. आइए कप्तान द्रविड़ का वो रूप जानने की कोशिश करते हैं जिसके बारे में जनता बहुत कम जानती है.
जैसे राहुल को क्या पसंद है, उनकी रुचियाँ क्या-क्या हैं और नन्हे राहुल और आज के राहुल में क्या कुछ बदला है.
हमारी सहयोगी सूफ़िया शानी मध्यप्रदेश के इंदौर में रहने वाली राहुल की 88 वर्षीया नानी श्रीमती मनोरमा काले से मिलने पहुँची और बातचीत का पिटारा खुला तो कई रोचक जानकारियाँ सामनें आईं कप्तान राहुल के बारे में.
मसलन राहुल आज भी एकदम सीधे-साधे हैं और गुलाब जामुन के शौक़ीन राहुल जहाँ भी होते हैं उनकी ख़ैर-ख़बर लेते रहते हैं. आइए जानते हैं राहुल के बारे में उनकी नानी का क्या कहना है.
“कोई परिवर्तन नहीं आया मेरे नन्हें राहुल और राहुल द्रविड़ में. उसमें आज भी वही सरलता और भोलापन है जैसा बड़ा खिलाड़ी बनने से पहले था.”
“बचपन में राहुल को मुझसे कहानियाँ सुनना बहुत अच्छा लगता था मैं हर रोज़ उसे शिवाजी और स्वामी विवेकानंद की कहानियाँ सुनाया करती थी और वह कहानी सुनते-सुनते सो जाया करता था. आज भी समय मिलने पर वह स्वामी विवेकानंद को ज़रूर पढ़ता है.”
"सभी को प्यार करता है राहुल और सब उसे. चाहे देश में हो या विदेश में फ़ोन करके मेरी तबियत ज़रूर पूछता है और घर आने पर भी, सबसे पहले मेरी तबियत पूछता है फिर हंसी-मज़ाक़ का सिलसिला शुरू होता है. हाँ हंसी-मज़ाक का रिश्ता भी है मेरा उससे, मज़ाक़ से कहता है, 'तुम बूढ़ी हो कर कैसी दिखने लगी हो.' मैं कहती हूँ-88 बरस की हो गयी हूँ तो ऐसी ही दिखूँगी."
"राहुल की सादगी देखिए...आजकल हर कोई अपनी पसंद की शादी करना चाहता है, लेकिन उसके लिए दुल्हन पूरे परिवार ने मिल कर पसंद की है."
"गुलाब जामुन के शौक़ीन राहुल के खाने-पीने में कोई ख़ास नख़रे नहीं है. करेला छोड़ कर सब कुछ पसंद है उसे. बचपन में राहुल गुलाब जामुन बहुत शौक़ से खाता था. हालाँकि खाता अब भी है लेकिन गुलाब जामुन की गिनती कंट्रोल में है."
"इसमें कोई शक नहीं कि राहुल की लगन और मेहनत ने उसे इस बुलंदी पर पहुँचाया है लेकिन यह भी सच है कि पिता के सहयोग और प्रोत्साहन के बिना यह संभव नहीं हो पाता."
"राहुल के पिता ख़ुद क्रिकेट खेलते थे और अच्छा खेलते थे. उनकी यह दिनचर्या थी कि वह खाने की टेबल पर अपने दोनों बेटों के साथ घंटों खेल की बातें करते थे. घर में जो भी पत्रिका आती थी वह खेल से संबंधित होती थी. बातचीत में राजनीति या दूसरे विषय के लिए कोई जगह नहीं थी."
"राहुल की मां पुष्पा द्रविड़ न सिर्फ एक अच्छी माँ है, बल्कि वे एक जानी-मानी पेंटर भी हैं. क्रिकेट की बारीकियाँ तो वे नहीं समझतीं लेकिन राहुल का हर मैच ज़रूर देखती हैं."
"ऐसा नहीं था कि राहुल ने बचपन में दूसरे खेल खेले ही नहीं. वह बॉस्केटबॉल और फ़ुटबॉल में भी माहिर था. कई बार उसने फ़ुटबॉल मैच खेल कर स्कूल के लिए ट्रॉफ़ी जीती थी. लेकिन क्रिकेट का जुनून दीवानगी की हद तक था, वह घर पर ही बॉलिंग और बैंटिग की ऐक्टिंग करता रहता था जिसे देखकर हमें विश्वास हो चला था कि वह एक दिन क्रिकेट में नाम ज़रूर कमाएगा."
“शमित (राहुल का बेटा) बड़ा होकर क्रिकेट खेलेगा या नहीं यह तो वक़्त ही बताएगा. अभी तो राहुल के लिए यही शुभकामनाएँ हैं कि वह हर दिन सफलता की सीढ़ियाँ चढ़े”.