रविवार, 12 फ़रवरी, 2006 को 15:12 GMT तक के समाचार
अरुण लाल
पूर्व क्रिकेटर, लाहौर से
हालाँकि भारत ने रावलपिंडी में इस दौरे की अपनी पहली जीत दर्ज की थी, पर भारतीय टीम ने पूरे दौरे में बहुत बढ़िया प्रदर्शन किया है.
भारत ने पहले दो टैस्ट मैचों में 600 रनों का पीछा कर मैच बचाए थे.
भारतीय टीम केवल कराची का मैच ठीक नहीं खेल पाई थी.
पेशावर में पहले एकदिवसीय मैच में भी जब भारत ने 328 रन बनाए तो वह 350 भी बना सकता था. पाकिस्तान वह मैच बहुत आसानी से नहीं जीती थी.
भारत और पाकिस्तान के टीमों के बीच आगे आने वाले मुकाबले भी बहुत करीबी रहेंगे.
शोएब की कमी
पाकिस्तानी टीम को शोएब अख्तर की कमी काफी खल रही है.
भारत और पाकिस्तान की गेंदबाज़ी की तुलना की जाए तो कोई फर्क नहीं दिख रहा है. पाकिस्तानी टीम में केवल शोएब अख्तर प्रभावशाली लगते हैं.
और अगर शोएब इस श्रृंखला में आगे नहीं खेल पाएंगे तो उनकी अनुपस्थिति से पाकिस्तानी टीम को काफी नुकसान हो सकता है. इसके चलते पाकिस्तानी टीम पर भी मनोवैज्ञानिक दबाव देखने को मिलेगा.
भारतीय टीम काफी उत्साहित लग रही है. भारतीय टीम को अपने-आप में काफी यक़ीन आ चुका है.
भारतीय टीम की जहाँ तक कप्तानी की, बैटिंग की, बॉलिंग की आलोचना होती है मुझे नहीं लगता इससे कुछ फर्क पड़ता है. ये पेशेवर और परिपक्व खिलाड़ी हैं. वे जानते हैं कि लोग इतने भावुक होते हैं कि एक मैच हारने पर ऊंगलियाँ उठाने लगते हैं और दूसरे दिन मैच जीतते ही सब सामान्य हो जाता है.
रन बनाने होंगे
जहाँ तक विकेट का सवाल है तो लाहौर का विकेट भी पारंपरिक तौर पर बैटिंग के लिए उपयुक्त रहती है और इस बार भी ऐसा लग रहा है कि इस पिच पर बैटिंग करना काफी आसान रहेगा.
दोनों टीमों को 300 से ऊपर स्कोर बनाना ज़रूरी होगा.
दोनों ही टीमों पर दबाव रहेगा. चाहे आप पीछा कर रहे हों या पहले बैटिंग कर रहे हों. पर मैं समझता हूँ कि जो टीम बाद में बैटिंग करेगी उसकी जीत की ज़्यादा उम्मीद होगी.