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मंगलवार, 03 जनवरी, 2006 को 07:29 GMT तक के समाचार

सौरभ चुनौती स्वीकार करने को तैयार

भारत के पूर्व क्रिकेट कप्तान सौरभ गांगुली अपने खेल जीवन के एक ख़राब साल के बाद वर्ष 2006 को पाकिस्तान दौरे से संवारने की कोशिश करने के लिए पक्का इरादा करते नज़र आ रहे हैं.

ग़ौरतलब है कि भारतीय टीम पाँच जनवरी को पाकिस्तान पहुँचेगी और यह दौरा 24 फ़रवरी तक चलेगा.

सौरभ गांगुली ने भारतीय मीडिया से कहा है, "जहाँ तक मेरे क्रिकेट जीवन का सवाल है तो साल 2005 मेरे लिए बहुत ख़राब रहा. मैं बहुत ख़ुश हूँ कि साल 2005 गुज़र गया है."

"लब्बोलुबाव ये है कि मुझे बहुत से रन बनाने होंगे. मैं अपना ध्यान नहीं बँटने देना चाहता हूँ और मैं किसी विवाद में भी नहीं पड़ना चाहता हूँ."

साल 2005 में गुली को कप्तानी से हाथ धोना पड़ा और प्रथम श्रेणी क्रिकेट की टीम में भी उनका स्थान नहीं बच सका.

नए कोट ग्रेग चैपल ने नेतृत्व में जो नई टीम बनी उसमें शायद गांगुली को अपनी जगह बनाने में मुश्किल हुई.

33 वर्षीय गांगुली की क्रिकेट विशेषज्ञों ने भी ख़ासी आलोचना की और ख़ासतौर से क्रिसमस के मौक़े पर अपने परिवार के साथ समय बिताने के लिए उन्होंने जब बंगाल के लिए खेले जाने वाले एक मैच से अपने आप को अलग कर लिया तो उसके लिए भी उनकी काफ़ी आलोचना हुई.

लेकिन इस पर गांगुली का कहना था, "यह उनकी अपनी राय है - मैं इससे कोई मतलब नहीं रखता कि वे क्या सोचते या मानते हैं."

चुनौती

हाल ही में श्रीलंका के ख़िलाफ़ टेस्ट मैच के लिए चुनी गई टीम में जब सौरभ गांगुली को नहीं लिया गया तो ऐसा लगा कि समय दस साल पीछे चला गया हो जब सौरभ गांगुली टीम में जगह बनाने की कोशिश कर रहे थे.

सौरभ ने कहा, "1996 में टीम में जगह बनाना मेरे लिए काफ़ी मुश्किल साबित हो रहा था." टीम में जगह बनाने के बाद इंग्लैंड के ख़िलाफ़ पहले दो टेस्ट मैचों में सौरभ गांगुली ने शतक लगाए थे.

अब सौरभ गांगुली का कहना था, "यह अब काफ़ी मुश्किल है लेकिन मैं इस चुनौती को स्वीकार करने के लिए तैयार हूँ. मेरे लिए साल-2006 की यही चुनौती होगी."

सौरभ गांगुली ने कहा कि पाकिस्तानी ज़मीन पर फिर एक बार जीत हासिल करने की भारतीय टीम की प्रबल संभावनाएँ हैं. ग़ौरतलब है कि अप्रैल 2004 में पाकिस्तान में दोनों देशों के बीच हुई श्रंखला भारत ने जीती थी.

सौरभ गांगुली ने कहा, "अगर हमें उन्हें इस बार भी हराना है तो हमें बल्लेबाज़ी बहुत अच्छी करनी होगी. यह एक मूल मंत्र है और ऐसी कोई वजह नज़र नहीं आती कि हम यह नहीं कर सकते."