सोमवार, 28 नवंबर, 2005 को 19:36 GMT तक के समाचार
पंकज प्रियदर्शी
बीबीसी संवाददाता, लंदन
कड़े मुक़ाबले में ही सही भारत ने दक्षिण अफ़्रीका से सिरीज़ बराबर करने में सफलता पा ही ली. इस सिरीज़ से पहले श्रीलंका को रौंद कर भारतीय टीम के हौसले बुलंद थे, तो न्यूज़ीलैंड को पस्त कर दक्षिण अफ़्रीका की टीम भी उत्साह से भरी हुई थी.
इस सिरीज़ में दो दिग्गजों का संघर्ष क्रिकेट प्रेमियों को देखने को मिला लेकिन चेन्नई मैच रद्द होने के कारण सिरीज़ का परिणाम नहीं निकल पाया. वैसे देखा जाए तो दोनों टीमों की मौजूदा स्थिति को देखते हुए यही शायद सबसे बेहतर परिणाम था.
कोच ग्रेग चैपल और कप्तान राहुल द्रविड़ के नेतृत्व में भारतीय टीम ने पिछले दो सिरीज़ में बेहतरीन प्रदर्शन किया है. श्रीलंका के ख़िलाफ़ तो टीम ने ऐसा प्रदर्शन किया जो लंबे समय तक क्रिकेट प्रेमी नहीं भूलेंगे.
दक्षिण अफ़्रीका के ख़िलाफ़ वैसी स्थिति तो नहीं रही लेकिन अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद की रैंकिंग में ऑस्ट्रेलिया के बाद दूसरे नंबर की मज़बूत टीम से भारत ने ठीक-ठाक ढंग से निपटने में सफलता पाई.
भारत ने दक्षिण अफ़्रीका के ख़िलाफ़ मैचों में कभी शानदार प्रदर्शन किया तो कभी इतना निराश किया कि पूछिए मत.
श्रीलंका के ख़िलाफ़ सिरीज़ में उत्साह और बढ़े हुए मनोबल से भरी भारतीय टीम का वो रूप दक्षिण अफ़्रीका के ख़िलाफ़ देखने को नहीं मिला. कोलकाता में वनडे में तो मिली हार भारत के लिए हाल के वर्षों की सबसे बुरी हार में से एक थी.
वजह
वजह एक नहीं कई है. इनमें से एक वजह तो मुंबई का मैच शुरू होने से पहले दक्षिण अफ़्रीका के विकेटकीपर मार्क बाउचर ने ही गिना दिया था.
पूर्व कप्तान सौरभ गांगुली को लेकर चल रहे मतभेद ने इस सिरीज़ में ज़्यादा पाँव पसारे हालाँकि इसकी शुरुआत को श्रीलंका के ख़िलाफ़ सिरीज़ में ही शुरू हो गई थी.
कोलकाता के मैच में मैदान पर मिली हार और मैदान से बाहर चल रहे विरोध और विवाद ने जैसे भारतीय टीम के पाँव उखाड़ दिए. कोलकाता में तो कहीं से ये लगा ही नहीं कि ये वही टीम है जिसने कुछ ही दिन पहले श्रीलंका को बुरी तरह पछाड़ा था.
शायद टीम सौरभ गांगुली विवाद की छाया में मैदान पर उतरी थी. कोलकाता के दर्शक भारतीय टीम की ही हूटिंग कर रहे थे और ग्रेग चैपल के तस्वीरों पर तो जूतों के हार चढ़ाए जा रहे थे.
हश्र क्या हुआ, आपने देखा, हमने देखा- कई लोगों ने देखा और महसूस किया. इसी बीच ग्रेग चैपल के 'अश्लील इशारे' वाली ख़बर ने जैसे आग में घी का काम किया. मुंबई मैच से पहले सब ओर से टीम आलोचना का सामना कर रही थी.
और इस पर मार्क बाउचर ने क्या कहा, आप भी पढ़िए: "भारतीय टीम ख़राब दौर से गुजर रही है और इस स्थिति में मतभेद उभर कर सामने आ जाते हैं."
विवाद
गांगुली को टेस्ट टीम में जगह मिली तो सर्वसम्मति से नहीं बल्कि बहुमत से और रिसते-रिसते ये भी ख़बर आई कि कप्तान द्रविड़ और कोच चैपल ने उन्हें शामिल किए जाने का विरोध किया था.
ऐसी स्थिति में मुंबई के मैदान पर उतरी भारतीय टीम को मिली जीत आसान तो कतई नहीं थी. मनोबल कम, स्टार खिलाड़ी ख़राब फ़ॉर्म में और कप्तान-कोच की हो रही ऐसी-तैसी.
ख़ैर भारतीय टीम जीती और सिरीज़ बराबर हुई. हार का हौआ ख़त्म हुआ. लेकिन चैपल और द्रविड़ की हिट जोड़ी को अभी लंबा सफ़र तय करना है. ऐसी मनोवैज्ञानिक स्थिति से कई बार निपटना पड़ सकता है. अच्छा होगा अगर कोलकाता की कटु याद को जल्द ही मुंबई में भूलने वाली भारतीय टीम की ये कला आगे भी जारी रहे.
सबक कोलकाता से तो मिले ही. सबक सिरीज़ से भी मिले. सिरीज़ भले ही बराबर हो गई लेकिन कई खिलाड़ियों का पलड़ा नीचे की ओर ही झुका रहा.
इनमें से एक रहे मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर. सौरभ गांगुली को टीम से बाहर निकालने वाले टीम प्रबंधन का तर्क आज नहीं तो कल तेंदुलकर पर भी लागू होगा और सहवाग पर भी.
तेंदुलकर ने मुंबई मैच से पहले तीन मैचों में कुल छह रन बनाए थे. मुंबई में कुछ स्थिति ठीक रही और वे 30 के आँकड़े के पास तक पहुँचे. लेकिन उम्मीद से बहुत कम रहा उनका प्रदर्शन.
अगर सचिन चाहते हैं कि विश्व कप तक भारतीय टीम को उनकी ज़रूरत पड़ती रहे तो नाम से ज़्यादा मैदान पर काम करके दिखाना होगा अन्यथा सौरभ को बाहर रखने का तर्क एक दिन उन्हें भी भारी पड़ सकता है.
सहवाग का बल्लेबाज़ी क्रम बदलता तो रहा लेकिन उनमें भी वो धार नहीं दिखी जिसके लिए वे मशहूर है. युवराज सिंह के लिए सिरीज़ अच्छी रही तो जाते-जाते कप्तान राहुल द्रविड़ ने अपने संयम का लोहा मनवा ही लिया.
औसत प्रदर्शन
गेंदबाज़ी में भारतीय खिलाड़ियों का प्रदर्शन औसत रहा. पठान एक मैच में चले, तो दूसरे में पिटे. अगरकर का प्रभाव ज़्यादा कुछ नहीं रहा और यही हाल रहा तो रुद्र प्रताप को अपनी सीट भविष्य में गँवानी पड़ सकती है.
इस सिरीज़ के बाद हो सकता है कि टीम प्रबंधन ज़हीर ख़ान जैसे कुछ अनुभवी गेंदबाज़ों के बारे में गंभीरता से विचार करे, जो टीम का दरवाज़ा खटखटा रहे हैं.
वैसे कप्तान द्रविड़ और कोच चैपल श्रीलंका के ख़िलाफ़ सिरीज़ की तरह इसमें भी अच्छे नंबर ले गए भले ही 10 में से उन्हें आठ या सात ही अंक मिले.
आख़िर में कहावत भी है कि अंत भला तो सब भला. भारत ने इस साल एक दिवसीय सिरीज़ की समाप्ति अच्छा संकेत देकर की है. संकेत अच्छे भविष्य का है और भविष्य में भारतीय टीम की नज़र है विश्व कप पर.