बुधवार, 27 जुलाई, 2005 को 23:01 GMT तक के समाचार
इस बात में कोई शक नहीं है कि सचिन तेंदुलकर भारत के सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाज़ों में से हैं और दुनिया भर में बेहद लोकप्रिय हैं.
16 साल की उम्र से क्रिकेट की दुनिया से जुड़े तेंदुलकर के प्रशंसकों की गिनती लाखों में है.
तेंदुलकर को केंद्र बिंदु में रखकर कई मशहूर विज्ञापन बन चुके हैं लेकिन अब सचिन पर एक संगीत नाटक बनाया गया है.
मुंबई में आधारित सब्यसाची देब बर्मन द्वारा लिखित और निर्देशित नाटक ‘मैं सचिन तेंदुलकर’ का मंचन पिछले महीने किया गया.
सब्यसाची देब बर्मन बताते हैं कि उन्होंने ये नाटक इसलिए लिखा क्योंकि सचिन उत्कृष्टता की ऐसी मिसाल हैं जिसका अनुसरण सबको करना चाहिए.
ये संगीत नाटक एक युवक के इर्द गिर्द घूमता है जिसका नाम सचिन करमरकर है. सचिन क्रिकेट का दीवाना है और तेंदुलकर का ज़बरदस्त प्रशंसक भी.
गली में क्रिकेट खेलना वाला ये युवक अपने साथियों के बीच स्टार है और उसके दोस्त उसे तेंदुलकर के नाम से पुकारते हैं.
लेकिन क्रिकेट के प्रति उसके जुनून और आम जिंदगी में उसकी आकांक्षओं में ज़मीन आसमान का फ़र्क है.
जैसे जैसे कहानी आगे बढ़ती है इस क़िरदार को एहसास होता है कि हर इंसान में एक संपूर्ण व्यक्ति छिपा होता है, एक ‘सचिन तेंदुलकर’ छिपा होता है.
हालांकि उसे काँच की एक फ़ैक्टरी में क़ाम करके की संतुष्ट होना पड़ता है.
सचिन की लोकप्रियता
निर्दशक बर्मन का कहना है कि वो इस नाटक का मंचन देश भर में करना चाहते हैं.
उनका मानना है कि जब कोई व्यक्ति अपने क्षेत्र में उत्कृष्टता हासिल कर लेता है वो एक तरह से ‘सचिन तेंदलुकर’ बन जाता है.
ख़ुद सचिन के प्रशंसकों में से एक बर्मन को उम्मीद है कि वो स्वयं इस संगीत नाटक को देखने आएँगे.
इस संगीत नाटक में दिखाया गया है कि सचिन के क़द्रदान सिर्फ़ ईडन गार्डन और नेहरू स्टेडियम जैसे जगहों पर ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में हैं.
पहले विज्ञापन और अब संगीत नाटक. इसके बाद अब सचिन के लिए अगला पड़ाव शायद बॉलीवुड ही हो सकता है.